आकाशवाणी अल्मोड़ा के कार्यक्रम अब नैनीताल, पिथौरागढ़ समेत कुमाऊं के पांचों जिलों तक सुनाई पड़ेंगे।
आकाशवाणी को मीडियम वेव की जगह एफएम ट्रांसमीटर से जोड़ा जा रहा है। एफएम ट्रांसमीटर में तब्दील होने के बाद रेडियो में अल्मोड़ा आकाशवाणी के कार्यक्रम 25 किमी (हवाई दूरी) परिधि तक पहले की अपेक्षा बहुत साफ सुनाई देंगे।
पौने दो करोड़ रुपए का बजट
इसके लिए प्रसार भारती ने पौने दो करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि अगले साल तक एफएम ट्रांसमीटर लग जाएगा। इंटरनेट और टीवी के इस युग में भी रेडियो की प्रासंगिकता बनी हुई है।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी बात आम जनता तक पहुंचाने के लिए रेडियो को उचित माध्यम मानते हैं लेकिन अल्मोड़ा के आकाशवाणी केंद्र से प्रसारित होने वाले कार्यक्रम 28 साल बाद भी बहुत सीमित दायरे तक ही सुनाई देते हैं।
1986 में जब आकाशवाणी केंद्र खुला तब यहां एक किलोवाट क्षमता का मीडियम वेव ट्रांसमीटर लगाया गया। तब से आज तक इसकी क्षमता नहीं बढ़ाई गई। मीडियम वेव से प्रसारित होने वाले कार्यक्रम अल्मोड़ा के आसपास तक ही सीमित रह जाते हैं। कई बार इसकी क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव हुआ लेकिन भूमि उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण हर बार प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।
अब प्रसार भारती ने मीडियम वेव की जगह एफएम ट्रांसमीटर लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आकाशवाणी अल्मोड़ा के प्रभारी निदेशक मनोहर सिंह बृजवाल ने बताया है कि इसके लिए करीब पौने दो करोड़ रुपए का बजट मंजूर हो चुका है।
उम्मीद है कि अगले बजट वर्ष में मीडियम वेव के स्थान पर एक किलोवाट क्षमता का एफएम ट्रांसमीटर लग जाएगा। इसके लिए अलग से जमीन आदि की भी जरूरत नहीं है। आकाशवाणी केंद्र में सिर्फ ट्रांसमीटर ही बदला जाएगा।
एफएम ट्रांसमीटर लगने के बाद रेडियो में आवाज पहले की अपेक्षा काफी साफ सुनाई देगी। साथ ही उम्मीद है कि अब आकाशवाणी अल्मोड़ा के कार्यक्रम कुमाऊं के पांचों जिलों तक सुनाई देंगे।