प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में अहम जिम्मा उठाने वाले खुफिया ब्यूरो के पूर्व प्रमुख अजीत डोभाल अपने कॉलेज टाइम में आत्म विश्वास से भरपूर थे।
बीएसएम डिग्री कॉलेज रुड़की में पढ़ाई के दौरान बिल्डिंग डोनेशन न देने पर अड़ गए थे।
आखिर प्राचार्य प्रो. विश्वनाथ शुक्ल को भी इसे माफ करना पड़ा था। प्रो. शुक्ल 1960 से लेकर 1986 तक कॉलेज का हिस्सा रहे। 1986 में उन्होंने प्राचार्य पद से सेवानिवृत्ति ली।
अमर उजाला से साझा कीं यादें
शनिवार को सेवक आश्रम रोड स्थित आवास पर उन्होंने अमर उजाला से अपनी यादें साझा कीं। बकौल प्रो. शुक्ल 60 का दशक था।
बिल्डिंग डोनेशन उस वक्त 10 रुपए लिया जा रहा था। अजीत डोभाल का यह अड़ जाने का गुण मुझे बहुत पसंद आया था, यह उनकी नेतृत्व क्षमता का परिचायक था।
मेरे मित्र और अजीत डोभाल के पिता मेजर गुणानंद डोभाल का आवास रुड़की की सैनिक कॉलोनी में था। यहां अक्सर उनके घर जाना होता था।
रिजर्व नेचर और मोटा चश्मा
अजीत बहुत रिजर्व नेचर के थे और मोटा चश्मा पहना करते थे। ऐसी स्थिति में लगता था कि वह केवल पढ़ाई में बेहतर होंगे, लेकिन उन्होंने खेल में भी स्वयं को साबित किया।
बता दें कि वर्ष 1968 बैच के केरल कैडर के आईपीएस अधिकारी अजीत डोभाल को खुफिया क्षेत्र का श्रेष्ठ अधिकारी माना जाता है।
तकरीबन 33 साल तक खुफिया अधिकारी के तौर पर कार्य किया। पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर पंजाब में तैनात रहे। पाकिस्तान, इंग्लैंड में राजनयिक मिशनों को अंजाम दिया।