भाजपा ने गैरसैंण राजधानी के मुद्दे पर सीएम हरीश रावत को कटघरे में खड़ा किया। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने सीएम पर आरोप लगाया कि तीन बार विधानसभा का सत्र गैरसैंण में बुलाने के बाद सरकार न तो गैरसैंण पर चर्चा के लिए तैयार होती है, न ही स्वयं कोई निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की नियत में खोट है। उन्होंने सीएम के सदन में गैरसैंण को लेकर लिए संकल्प को जनभावनाओं से खिलवाड़ करार दिया।
भट्ट ने कहा कि बीजेपी गैरसैंण को स्थाई, अस्थाई या ग्रीष्कालीन राजधानी बनाने के लिए तैयार है। सदन के भीतर हम इसकी मांग करते रहे है। सदन से अनुपस्थित रहने की हमारी मंशा नहीं थी, लेकिन बहिर्गमन कर हमने सरकार पर दबाव बनाया, जिसका सीएम पर कोई असर नहीं पड़ा।
सातवीं बार सरकार ने गैरसैंण बुलाया, लेकिन स्थिति साफ करने को तैयार नहीं है कि आखिर सदन बुलाया क्यों है। सरकार ने सिर्फ ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए भवनों का निर्माण करवाया, जबकि शासनादेश में गैरसैंण में निर्माण को अतिथिगृह बताकर काम चल रहा है।
सदन के भीतर सीएम कुछ कहते हैं और बाहर कोई और बयान देते हैं। वर्ष 2015 को सत्र से पूर्व सरकार ने गैरसैंण पर प्रस्ताव लाने की बात कही, लेकिन ऐन मौके पर मुकर गई। एक दिसंबर 2015 को गैरसैंण को राज्य अतिथि गृह बना दिया। एक खरब पांच करोड़ गैरसैंण में खर्च करने के बाद भी सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही।