फाउंडेशन के सह संस्थापक आशुतोष कंडवाल ने बताया कि उनकी टीम ने बल्लीवाला चौक, निरंजनपुर सब्जी मंडी, पटेलनगर, सहारनपुर चौक, झंडा चौक, खुड़बुड़ा मोहल्ला, गांधीग्राम, गोविंदगढ़ और घंटाघर में वायु प्रदूषण की स्थिति मापी गई है।
इस दौरान घंटाघर जैसे खुले क्षेत्र की तुलना में घनी आबादी वाले पटेलनगर और गांधीग्राम आदि में प्रदूषण का स्तर ज्यादा दर्ज किया गया। दिवाली की रात साढ़े नौ बजे से 11 बजे तक अत्याधुनिक मशीन से शहर के पांच इलाकों में वायुमंडल में मौजूद पीएम-2.5 और पीएम-10 का स्तर मापा गया।
नौ नवंबर तक प्रदूषण स्तर मापने के बाद रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभागों को सौंपी जाएगी। इससे पहले फरवरी में भी फाउंडेशन ने शहर के प्रमुख चौराहों और व्यावसायिक स्थलों पर प्रदूषण का स्तर मापा गया था, लेकिन इस बार अभियान के लिए रिहायशी इलाकों को चुना गया है।
क्या है पीएम-2.5 और पीएम-10
हवा में पीएम-2.5 की मात्रा 60 और पीएम-10 की मात्रा 100 होने पर हवा को सांस लेने के लिए सुरक्षित माना जाता है। इससे अधिक मात्रा होने पर स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
पुलिस द्वारा दीपावली की रात निर्धारित समय सीमा के बाद पटाखे छोड़ने वाले 12 लोगों का पुलिस एक्ट में चालान कर जुर्माना वसूला गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में शासन ने रात में आठ बजे से लेकर दस बजे तक आतिशबाजी का समय निर्धारित किया था।
थाना प्रभारियाें ने अपने-अपने क्षेत्र में लाउडस्पीकर से आतिशबाजी को लेकर समय सीमा का प्रचार किया था। चेतावनी दी थी कि दस बजे के बाद पटाखे छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसी क्रम में पुलिस ने ऐसे 12 लोगों का पुलिस एक्ट में चालान किया गया है। इनमें राजपुर पुलिस ने छह, प्रेमनगर ने दो, रायपुर ने एक और शहर कोतवाली पुलिस ने तीन लोगाें का चालान कर 3750 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
आतिशबाजी से घायल हुए 83 लोग
देहरादून। दिवाली पर आतिशबाजी के दौरान 83 लोग झुलस गए। जबकि, सड़क दुर्घटनाओं में 20 से अधिक लोग घायल हुए। इतना ही नहीं आतिशबाजी को लेकर हुई कहासुनी और मारपीट में भी 18 लोग घायल हो गए। वहीं, कुत्तों ने चार लोगों को काट लिया।
दून अस्पताल के सीएमएस डॉ. केके टम्टा ने बताया कि आतिशबाजी के दौरान घायल हुए 53 लोगों को एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया, जिनमें कई बच्चे शामिल थे। डॉ. टम्टा ने बताया कि आतिशबाजी के दौरान घायल लोगों का देर रात तक अस्पताल पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। दूसरी ओर दून अस्पताल के अलावा कोरोनेशन व शताब्दी अस्पताल में भी घायलों का इलाज किया गया। सीएमएस डॉ. बीसी रमोला ने बताया कि कोरोनेशन अस्पताल में 30 घायलों का इलाज किया गया।