एम्स निदेशक ने बताया कि मेडिकल की पढ़ाई में शामिल किए जा रहे व्यावहारिक विषय को स्टूडेंट्स के व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए शामिल किया जाएगा। यह मेडिकल के क्षेत्र में अपने आप में खास विषय होगा।
हालांकि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने मानव व्यवहार को लेकर एटकन मॉड्यूल तैयार किया है, मगर एम्स ऋषिकेश का सब्जेक्ट मॉडल इस मामले में ज्यादा कारगर व उपयोगी होगा। इसमें मेडिकल स्टूडेंट्स मरीजों की परेशानियों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। इससे एम्स व संस्थान के चिकित्सकों के प्रति लोगों का विश्वास और बढ़ेगा।
स्टूडेंट्स के व्यवहार की रिपोर्ट भी होगी तैयार
स्टूडेंट्स को मरीजों के साथ व्यावहारिक संबंधों की प्रगाढ़ता के बारे में विषय पढ़ाया जाएगा। इसमें इंटरपर्सनल स्किल के तहत मरीजों का सही परीक्षण कर बीमारी के मुताबिक दवाइयां लिखना होगा।
360 डिग्री इवोलेशन में स्टूडेंट्स की व्यावहारिक रिपोर्ट उनसे जुड़े शिक्षक तैयार करेंगे, साथ ही मरीज व अन्य संस्थागत कर्मचारियों से भी स्टूडेंट्स के व्यवहार की रिपोर्ट मांगी जाएगी। इसमें दोनों ही रिपोट्स का अलग-अलग महत्व होगा।