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ALERT: हेलो...मामा जी मैं अनुज बोल रहा हूं...मेरा एक्सीडेंट हो गया... ब्लैकमेलिंग के लिए हो रहा AI का इस्तेमाल

Thu, 03 Aug 2023 11:05 AM IST
देहरादून ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

साइबर ठगों ने एआई को ठगी करने का नया हथियार बनाया है। इसके लिए ये लोग पहले सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की आवाज सुनते हैं। इसके बाद एआई का इस्तेमाल कर उसकी आवाज से मिलती जुलती आवाज तैयार करते हैं। फिर इस आवाज में एक वॉयस मैसेज तैयार किया जाता है।
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साइबर क्राइम (प्रतीकात्मक) - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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हेलो...मामा जी मैं अनुज बोल रहा हूं...मेरा एक्सीडेंट हो गया है....मेरे खाते में 10 हजार रुपये डाल दो। इस तरह की कॉल आए तो सावधान हो जाएं। यह आपका कोई रिश्तेदार नहीं बल्कि उसकी क्लोन की गई आवाज में साइबर ठग हो सकता है।

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यह आवाज आपके रिश्तेदार के जैसी ही होगी, लेकिन बात ठग करता है। इसके लिए साइबर ठग एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने इससे बचाव के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। दरअसल साइबर ठगों ने एआई को ठगी करने का नया हथियार बनाया है। इसके लिए ये लोग पहले सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की आवाज सुनते हैं। इसके बाद एआई का इस्तेमाल कर उसकी आवाज से मिलती जुलती आवाज तैयार करते हैं। फिर इस आवाज में एक वॉयस मैसेज तैयार किया जाता है।

ठगी करने के लिए साइबर ठग उस व्यक्ति के रिश्तेदारों और परिचितों के मोबाइल नंबर भी जुटा लेते हैं और फिर इन नंबरों पर फोनकर रिकॉर्ड किया हुआ वॉयस मैसेज चलाया जाता है। इसमें एक्सीडेंट होने या किसी अन्य मजबूरी की बात कहते हुए उनसे रुपयों की मांग की जाती है। बहुत से लोग इस जाल में फंसकर साइबर ठगों को रुपये भेज भी रहे हैं।

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85 फीसदी तक मिलती है आवाज
एआई से तैयार की गई आवाज, असली आवाज से काफी हद तक मिलती जुलती होती है। इसलिए परिचित इसे पहचान नहीं सकते और जाल में फंस जाते हैं। डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि पिछले दिनों एक आवाज के वॉयस सैंपल की जांच की गई थी। इसमें सामने आया कि क्लोन की गई आवाज संबंधित व्यक्ति की आवाज से तकरीबन 85 फीसदी मिलती है। ऐसे में कोई भी आसानी से ठगों के झांसे में आ सकता है।

ब्लैकमेलिंग के लिए भी एआई का इस्तेमाल
साइबर ठग इन दिनाें एआई का सहारा ब्लैकमेलिंग के लिए भी कर रहे हैं। किसी को उसकी अश्लील फोटो या लोन की किश्त चुकाने के लिए विभिन्न तरीकों से दबाव बनाया जाता है। इसके लिए साइबर ठग एआई के माध्यम से अपने आसपास ऐसा माहौल तैयार करते हैं कि मानों वह किसी थाने या आयकर और बैंक के दफ्तर में बैठे हों। जिस व्यक्ति को फोन किया जाता है उसे पीछे से ऐसी बातें भी सुनाई देती हैं जो अक्सर पुलिस थानों में कही जाती हैं। मसलन, आरटी सेट की आवाज, किसी के सैल्यूट करने की आवाज, किसी को आदेश देने का माहौल आदि।
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ऐसे करें बचाव
-कॉल आने पर सबसे पहले उस पर शक करें। उससे कहें कि अभी दो मिनट में फोन करूंगा। इसके बाद संबंधित रिश्तेदार को कॉल कर पुष्टि कर लें।
-कॉल करने वाले से अपने परिवार की गोपनीय जानकारी पूछें। पिता-माता का नाम तो वह किसी भी दस्तावेज से ले सकता है, लेकिन दादा-दादी या नाना-नानी का नाम नहीं जानता होगा।
-बचपन या किसी घटना से संबंधित ऐसी बात पूछे जिसे सिर्फ परिवार वाले ही जानते हैं।
-एकाएक खाते में पैसे न ट्रांसफर करें। पहले खाते आदि के बारे में जानकारी कर लें। ताकि यह पुष्टि हो जाए कि आप किसी गलत खाते में पैसे तो नहीं भेज रहे हों।

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साइबर ठगी का यह बिल्कुल नया तरीका है। एआई के माध्यम से आवाज की क्लोनिंग कर धोखाधड़ी की जा रही है। इसके लिए पहले जांच परख बेहद जरूरी है। एआई से जो आवाज क्लोन की जाती है वह बिल्कुल मिलती जुलती होती है। -अशोक कुमार, डीजीपी
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