बीते लंबे समय से राज्यपाल की ओर से वार्ता के लिए समय न देने व 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण की मांग पूरी न होने से गुस्साए राज्य आंदोलनकारी 14 जुलाई को राजभवन मार्च करेंगे। रविवार को उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच की ओर से शहीद स्मारक पर बैठक की गई।
मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि बीते 21 सालों से प्रदेश की सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों की मांगों को अनदेखा करने का काम किया है। मांगों के संबंध में मंच राज्यपाल से वार्ता का समय मांग रहा है, लेकिन बीते राज्यपाल के पास आंदोलनकारियों से बात करने का समय नहीं है।
प्रदीप कुकरेती ने कहा कि बीते 21 सालों में पहली बार है कि राज्यपाल की ओर से आंदोलनकारी से वार्ता करने का समय नहीं दिया जा रहा है। वहीं, पूर्व राज्य मंत्री रविन्द्र जुगरान ने कहा कि बीते छह सालों से शहीद परिजनों व तमाम राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं का संज्ञान नहीं लिया गया है। वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी व महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुशीला बलूनी ने कहा कि ये हमारा दुर्भाग्य ही है कि राज्य के 21 वर्ष बाद भी सड़कों पर आने को विवश होना पड़ रहा है।
पूर्व राज्य मंत्री धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि राज्य के हित के लिए हम अंतिम क्षणों तक संघर्ष करेंगे। बैठक में संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष वेद प्रकाश, हर्षपति काला, महेन्द्र रावत, सुरेन्द्र कुकरेती, पूर्ण सिंह, विक्रम भंडारी, डीएस गुंसाई, ललित जोशी, रुकम पोखरियाल, जयदीप सकलानी, रामपाल, बलबीर नेगी, विनोद असवाल, पूर्ण सिंह राणा आदि मौजूद रहे।