वन रक्षकों के पद पर भर्ती की अधिकतम आयु सीमा 42 वर्ष से घटाकर 23 साल कर दी गई है। इससे बेरोजगारों को बड़ा झटका लगा है। हालांकि, वन मंत्री डा.हरक सिंह रावत का कहना है कि यह फैसला पिछली कांग्रेस सरकार का है।
पिछली सरकार में ही इसके लिए अधियाचन किया गया था। अब मामला आगे बढ़ चुका है। भर्ती प्रक्रिया को बीच में नहीं रोका जा सकता। प्रकरण उनके पास आने पर उम्र सीमा को लेकर फिर से विचार किया जाएगा।
प्रदेश में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से वन रक्षकों के 1200 पदों पर भर्ती होने जा रही है। भर्ती के लिए आयु सीमा को न सिर्फ अधिकतम 42 वर्ष से घटाकर 23 साल कर दिया गया है बल्कि शैक्षिक योग्यता भी हाईस्कूल से बढ़ाकर इंटरमीडिएट विज्ञान एवं कृषि विज्ञान वर्ग से कर दी गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विभाग में नई तकनीकी, एनजीटी से संबंधित मामले व वाइल्ड लाइफ से संबंधित प्रकरण आते हैं, पढ़े लिखे व चुस्त दुरुस्त वन रक्षक विभाग को मिले इसे लेकर यह निर्णय लिया गया है।
वहीं, विभागीय मंत्री का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार में इसके लिए अधियाचन किया गया था। इसके लिए उम्र सीमा पहले भेजी जा चुकी थी। अब बात आगे बढ़ चुकी है, लेकिन बेरोजगारों का अहित न हो इसके लिए इस पर फिर से विचार किया जाएगा। उधर, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि ऐसा नहीं है। मामले में किसी को दोषी ठहराने के बजाय समस्या का समाधान ढूंढा जाना चाहिए।
और होते-होते रह गई घोषणा
मालसी डियर पार्क में आयोजित समारोह में वन मंत्री डा.हरक सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री लच्छीवाला पिकनिक स्पॉट में भी इसी तरह का एक्वेरियम खोले जाने की घोषणा करें। इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह कहते हुए गेंद वन मंत्री के पाले में डाल दी कि अच्छा यह होगा कि वन मंत्री खुद इसकी घोषणा करें। लेकिन इसके बाद न मुख्यमंत्री न वन मंत्री ने इस संबंध में कुछ कहा। बाद में वन मंत्री ने बताया कि लच्छीवाला में नेचुरल वाटर फॉल पर काम किया जा रहा है।