इसके बावजूद सरकार उनकी मांगों को भूल गई। उन्होंने कहा कि आठ अक्तूबर को स्वामी सानंद का स्वास्थ्य डॉक्टरी जांच में ठीक था, लेकिन प्रशासन ने उन्हें उठाकर एम्स में भर्ती कर दिया और अगले दिन ही उनकी हत्या करवा दी। उन्होंने कहा कि सरकारों ने एक जीवन को समाप्त कर दिया।
सीबीआई के एक शीर्ष अधिकारी के घूसखोरी में संलिप्त होने का मामला सामने आने पर मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने स्वामी निगमानंद की मृत्यु के मामले में भी सीबीआई पर दस करोड़ लेकर मामला रफादफा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से सीबीआई की भूमिका पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन कोई नहीं मानता था।
अब घूसखोरी सामने आने पर साफ हो गया कि अधिकारी रिश्वत लेकर रिपोर्ट बदलने का काम करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी निगमानंद की मृत्यु की जांच फिर से होनी चाहिए।
मातृसदन में स्वामी शिवानंद सरस्वती और अनशनकारी संत आत्मबोधानंद से मिलने पहुंचे स्वामी प्रमोद कृष्णन ने केंद्र और राज्य सरकार को आडे़ हाथ लिया। उन्होंने कहा कि स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद देहावसान के लिए पूरी तरह से दोनों सरकारें जिम्मेदार हैं।
112 दिन तक देश और दुनिया के जानेमाने पर्यावरणविद और एक संत गंगा स्वच्छता के लिए अनशन पर बैठे रहे और केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर कभी भी गंभीरता से विचार नहीं किया। वे संत गंगा की रक्षा की पुकार करते हुए अपने प्राणों की आहुति तक दे बैठे। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की सत्ता में बैठे लोगों को एक मिनट भी सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए स्वामी प्रमोद कृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की स्वच्छता के नाम पर देश से बड़ा छल किया है। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद का बलिदान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की भाजपा सरकार को सबसे महंगा पडे़गा। कहा कि आज मातृसदन की उस पवित्र भूमि की माटी को अपने माथे पर लगाने और नमन करने के लिए आए हैं, जिस भूमि पर तप करते हुए गंगा रक्षा के लिए दो तपस्वी संतों स्वामी निगमानंद और स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने अपने प्राणों की बलि दे दी।