यूपीएससी ने डीजीपी के लिए किया था बदलावI
डीजीपी बनने के लिए जरूरी अर्हता के अनुसार प्रदेश में कोई 30 साल की सेवा पूरी कर चुका आईपीएस अधिकारी नहीं था। ऐसे में यूपीएससी ने डीजीपी के लिए इस नियम को बदलते हुए सेवाकाल संबंधी अर्हता को 25 वर्ष कर दिया था। इस नए नियम के दायरे में प्रदेश कैडर के कुल सात अपर पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी आए थे। इनका नाम यूपीएससी के पैनल में भेजने पर चर्चाएं हो रही थीं। लेकिन, अंतिम समय में सरकार ने इस पैनल को आगे नहीं भेजा। तब से नए डीजीपी के नाम पर असमंजस बना हुआ था। अंतिम समय तक नाम की घोषणा नहीं हुई थी। हालांकि, काफी दिनों से अभिनव कुमार के नाम पर ही मुहर लगने की चर्चाएं चल रही थीं।
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अब डीजीपी अशोक कुमार के सेवानिवृत्त होने से ठीक एक दिन पहले एडीजी अभिनव कुमार को कार्यवाहक डीजीपी बनाए जाने की घोषणा की गई है। प्रदेश में अब तक सभी 11 डीजीपी यूपीएससी के माध्यम से ही चुनकर आए थे। कार्यवाहक डीजीपी की व्यवस्था पहली बार की गई है। गृह विभाग के आदेश के अनुसार अग्रिम आदेशों तक उन्हीं के पास डीजीपी का अतिरिक्त पदभार रहेगा। अब आमचुनाव भी होने हैं। ऐसे में देखने वाली बात यह है कि यहां कोई पूर्ण डीजीपी आएंगे या फिर 2024 के आमचुनावों में भी कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी कार्यवाहक डीजीपी के पास ही रहेगी।