सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) चकराता के बरामदे में दो साल तक पड़े रहने के बाद डिजिटल एक्सरे मशीन से मरीजों की जांच शुरू कर दी गई है। रोजाना छह से आठ लोगों की जांच हो रही है।
सीएचसी चकराता में वर्ष 2021 में करीब 20 लाख रुपये की डिजिटल एक्सरे मशीन भेजी गई थी। डिजिटल एक्सरे मशीन से सामान्य एक्सरे मशीन के मुकाबले अधिक साफ एक्सरे फिल्म मिलती है। यह छाती, हड्डी और अंदरूनी अंगों से संबंधित रोग और चोट के निदान (डायग्नोसिस) में चिकित्सकों के लिए काफी मददगार साबित होती है।
अस्पताल में मशीन आई तो क्षेत्र के करीब 200 गांवों के लोगों को लगा कि अब उनको डिजिटल एक्सरे की सुविधा मिलेगी। लेकिन पता चला कि अस्पताल में डार्क रूम नहीं है। डार्क रूम में ही एक्सरे संभव है। तब डार्क रूम बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने और डार्क रूम के निर्माण में करीब दो साल का समय लग गया। जब डार्क रूम बना तो उसमें रोशनदान बना दिया। जबकि डार्क रूम में बिल्कुल अंधेरा रहता है। उसके बाद रोशनदान बंद किया गया।
अब मशीन को स्थापित करने के साथ अस्पताल में डिजिटल एक्सरे की सुविधा शुरू कर दी गई है। एक्सरे टेक्नीशियन लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि अस्पताल में मरीजों को डिजिटल एक्सरे की सुविधा मिल रही है। रोजाना 6 से 8 लोगों की एक्सरे जांच की जा रही है।