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स्टिंग मामला: आईएएस के बाद भाजपा के ये मंत्री थे उमेश कुमार का टारगेट, पढ़ें क्या था पूरा प्लान

Tue, 30 Oct 2018 08:49 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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उमेश कुमार
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शिकायतकर्ता आयुष गौड़ ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर पूरे घटनाक्रम की शिकायत की थी, लेकिन दोनों जगह से करीब डेढ़ माह तक कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद उसने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। इसके कुछ दिन बाद ही मुकदमा दर्ज हुआ और मामले में जांच शुरू हो गई।  

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आयुष ने बताया कि उमेश ने उसे राज्यमंत्री धनसिंह रावत का स्टिंग करने के आदेश भी दिए थे। हालांकि, इससे पहले ही वह उमेश की मंशा को समझ गया और राज्यमंत्री से मुलाकात ही नहीं की। आयुष के मुताबिक उसने मुख्यमंत्री के जिन परिचितों और अधिकारियों से मुलाकात की उन्होंने किसी तरह के लेनदेन की बात नहीं की। 

आयुष ने बताया कि उमेश मुख्यमंत्री पर दबाव बनाना चाहता था। उमेश कहता था कि एक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ही हैं जो इन दिनों चैनल और उसे किसी प्रकार से ‘भाव’ नहीं दे रहे हैं। यदि यह सब स्टिंग हो जाते हैं तो मुख्यमंत्री उसकी मुट्ठी में होंगे। इसके बाद जो चाहे वह काम हो जाएगा। आयुष के मुताबिक इसी तरह की मंशा लेकर उमेश काम कर रहा था।

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पीएम-सीएम से नहीं मिला कोई जवाब

बकौल आयुष गौड़ वीडियो बनाने के बाद जब उसे काफी समय तक चैनल की ओर से कोई जवाब नहीं मिला तो वह सकते में आ गया। उसे उमेश शर्मा की वह बात याद आई जिसमें वह सरकार को अपने कब्जे में लेने की बात कर रहा था। याद आया कि उमेश शर्मा इन वीडियो को भी तोड़ मरोड़कर पेश कर सरकार को ब्लैकमेल कर सकता है। 

लिहाजा उसने सबसे पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इस पर बीते जून में उसने प्रधानमंत्री कार्यालय दिल्ली को पत्र लिखकर घटनाक्रम की जानकारी दी।

डेढ़ माह तक कोई जवाब नहीं आया तो जुलाई के अंतिम सप्ताह में उसने अपने एक परिचित की मदद से पुलिस से संपर्क किया। प्राथमिक जांच के बाद 10 अगस्त को मुकदमा दर्ज कर लिया गया। उसने सभी सीडी, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस राजपुर थाना पुलिस को उपलब्ध करा दी है। 
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