फ्लोर टेस्ट के बाद बाहर आते हरीश रावत
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फ्लोर टेस्ट होने तक पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की सांसे अटकी रही। भाजपा से बगावत करने वाले भीम लाल आर्य से बात नहीं होने के कारण अधिकारी सुबह तक चिंतित रहे। विधानसभा से सुरक्षित विधायकों के निकलते ही अधिकारियों के तनावग्रस्त चेहरों पर मुस्कराहट तैर गई। दरअसल विधायकों की सुरक्षा की चूक में सीधे तौर पर डीएम और एसएसपी की जिम्मेदारी फिक्स की गई थी।
भाजपा, कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय विधायकों को सुरक्षित विधानसभा तक लाने के लिए पुलिस-प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक रखी थी। शासन के अलावा पुलिस के आला अधिकारी भी पूरी प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहे।
छावनी में बदला था विस के आसपास का इलाका
कई दिनों से विधायकों से सुरक्षा को लेकर संपर्क चल रहा था। खुफिया तंत्र लगातार अपडेट दे रहा था। तमाम रास्तों पर पुलिस की एस्कोर्ट लगाने के साथ विधानसभा के बाहरी हिस्सों को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया था। अफसर एक-एक विधायक की सुरक्षा का गणित बनाए बैठे थे। पर विधायक भीमलाल आर्य से संपर्क नहीं होने से अधिकारी टेंशन में थे।
पुलिस टीम ने बीती रात आर्य के घर पहुंचकर पत्नी और भाई से उनके बारे में जानकारी हासिल करते हुए सुरक्षा का प्रस्ताव दिया। पर वहां से कोई पुख्ता आश्वासन नहीं मिला। मंगलवार को फ्लोर टेस्ट से पहले भीम लाल आर्य कांग्रेस विधायकों संग नजर आए तो अधिकारियों को थोड़ी राहत हुई।
सदन में फ्लोर टेस्ट संपन्न होने के बाद विधायकों को सुरक्षित निकालने के बाद डीएम रविनाथ रमन, एसएसपी सदानंद दाते के चेहरे पर राहत भरी मुस्कान नजर आई और दोनों आला अधिकारियों ने अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी।