साहिया। विकासखंड कालसी के अंतर्गत पंजिया गांव स्थित शिलगुर एवं बिजट देवता का सोमवार की सुबह अपने मूल थरन हिमाचल प्रदेश स्थित चूड़धार में 12 साल के लंबे इंतजार के बाद शाही स्नान होने के बाद तीन जुलाई को पंजिया गांव में जागड़ा मनाया जाएगा। इससे पूर्व अप्रैल माह की 13 तारीख को दोनों देवताओं को शाही स्नान कराया गया था। इस जागड़े को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
विधि विधान अनुसार पंजिया गांव स्थित शिलगुर एवं बिजट देवता का हर 12 साल बाद विशाल जागड़ा मनाए जाने की परंपरा है। इसी कड़ी में 12 साल के लंबे इंतजार करने पर देवता का हरिद्वार स्थित शाही स्नान 13 अप्रैल का शुभ मुहूर्त निकला था। जिस पर ग्रामीणों ने कोविड माहमारी के चलते कम भीड़ के बीच देवता को शाही स्नान कराया था। तब से दोनों देवताओं के पद चिह्न मंदिर के पास एक पेड़ पर विराजमान थे। दोनों देवताओं को पद चिह्नों को बीते शनिवार की देर शाम को स्थानीय ग्रामीणों ने हिमाचल प्रदेश स्थित देवता के मुलथरण चूड़धार नामक स्थान के लिए ले गये। जिनका सोमवार की सुबह 4 बजे शाही स्नान व देव दर्शन कराया जाएगा। जबकि 3 जुलाई की दोपहर दोनों देवताओं को मन्दिर में विराजमान कराया जाएगा। उसके बाद श्रद्धालुओं को देव दर्शन कराएं जाएंगे। यह मंदिर खत बाना के पंजिया, ददोऊ, बंनसार, चापनु, अमराहया व लुहांठा आदि गांवों के लोगों की आस्था का केंद्र है। कोविड माहमारी को ध्यान में रखते हुए 3 जुलाई को होने वाले देवता के जागड़े में सुरक्षा व्यवस्था व साफ सफाई रखने के लिए अभी से कमर कस ली है। गांव के बीडीसी मेंबर चतर सिंह चौहान व ग्राम प्रधान प्रीति चौहान आदि जनप्रतिनिधियों ने बताया कि जागड़े में 12 साल के लंबे इंतजार के बाद श्रद्धालुओं का आन लाजमी है, लेकिन उसके लिए हर तरह से पंजिया गांव तैयार है।