देश भर की सात लोकेशन पर चल रहे लाइट हाउस प्रोजेक्ट के मॉडल की केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की भूकंप के लिहाज से टेस्टिंग कर रहा है। चेन्नई में हाल ही में तैयार किए गए 1152 घर सिस्मिक जोन 4 में होने वाले भूकंपीय प्रभाव को झेलने में सक्षम पाए गए हैं। चेन्नई भूकंप की दृष्टि से सिस्मिक जोन 3 में आता है।
इसी तरह संस्थान अन्य लोकेशन में बन रहे भवनों की भी टेस्टिंग कर रहा है। सीबीआरआई रुड़की स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग विभाग के ग्रुप लीडर एवं वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अजय चौरसिया ने बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अरबन अफेयर्स, केंद्र सरकार की ओर से देश की सात लोकेशन में लाइट हाउस प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं।
इसके तहत चेन्नई, तमिलनाडु में हाल ही में 1152 भवनों के निर्माण का काम पूरा किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रीकॉस्ट कंकरीट कंस्ट्रक्शन सिस्टम- प्रीकास्ट कंपोनेंट्स एसेंबल एट साइट तकनीक से बनाए गए 3डी वॉल्यूमेट्रिक आधारित ये भवन कम लागत और समय में तैयार किए गए हैं। इस प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि इसमें भवनों को एक अलग जगह पर अलग-अलग पार्ट (ब्लॉक) में तैयार किया जाता है और फिर कंस्ट्रक्शन साइट पर असेंबल कर बिल्डिंग का रूप दिया गया है।
यही नहीं भवनों को असेंबल करने से पहले ही इनमें बिजली और पानी की फिटिंग समेत घर में निर्माण संबंधी तमाम वस्तुओं की जरूरत पहले पूरी कर ली जाती है। इन भवनों के मॉडल की भूकंपरोधी टेस्टिंग का काम सीबीआरआई रुड़की की लैब में किया गया है। टेस्टिंग के दौरान मॉडल भूकंप के मानकों पर खरे उतरे हैं। चेन्नई भूकंप के लिहाज से जोन दो और तीन में आता है जबकि यहां बनाए गए भवन जोन 4 में आने वाले भूकंपीय प्रभाव को झेलने में सक्षम हैं।
इसी तरह संस्थान के वैज्ञानिक अन्य लोकेशन पर भी तकनीकी मदद दे रहे हैं। अगरतला में बन रहे भवनों में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. चंचल सोनकर ने भूकंपरोधी टेस्टिंग की। वहीं संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. किशोर कुलकर्णी इंदौर में प्रीफेब्रिकेटिड पैनल सिस्टम तकनीक से बनाए जा रहे भवनों पर तकनीकी सहायता दे रहे हैं।