पुलिस राजकीय बाल संरक्षण गृह से फरार 15 किशोरों को पकड़ने की बात कर रही है, लेकिन बाल संरक्षण गृह के अधीक्षक केवल पांच किशोरों के ही फरार होने की बात कह रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि संरक्षण गृह के अधीक्षक इस बारे में गलत जानकारी दे रहे हैं। अपनी छवि बचाने के लिए वह ऐसा कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि दोनों में आखिर सच कौन बोल रहा है।
पुलिस के मुताबिक बुधवार रात रोशनाबाद में राजकीय बाल संरक्षण गृह की खिड़की तोड़कर पंद्रह किशोर फरार हो गए थे। सूचना मिलने पर सक्रिय हुई सिडकुल पुलिस ने किशोरों की धरपकड़ शुरू कर दी थी। देर रात तक चली धरपकड़ में पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस को किशोरों को पहचानना आसान नहीं था। इसलिए बाल संरक्षण गृह का स्टॉफ भी पुलिस के साथ मौजूद रहा।
पुलिस ने किसी किशोर को झाड़ी से धर दबोचा तो कोई पुलिस को देखकर भागते हुए धरा गया। पुलिस की इस एक्सरसाइज को देखकर कई राहगीरों के कदम भी ठिठक गए थे। देर रात तक चली भागदौड़ के बाद सिडकुल पुलिस ने फहरार हुए सभी पंद्रह किशोर पकड़ लिए, जिन्हें फिर से बाल संरक्षण गृह में दाखिल कर दिया गया। एसओ सिडकुल देवराज शर्मा की मानें तो किशोरों ने प्रारंभिक पूछताछ में उनके साथ मारपीट की बात कही है, जिस संबंध में जांच कर रहे हैं।
इस बारे में जब बाल संरक्षक गृह के अधीक्षक विजय दीक्षित से जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि सिर्फ पांच किशोर ही फरार हुए थे। उन्होंने खिड़की के सरिये निकालकर पीछे के रास्ते फरार होने की बात से भी इनकार किया। दीक्षित का कहना है कि पांचों बच्चे अनाथ हैं और खेलते-खेलते बाहर भाग निकले थे। उन्होंने बताया कि पूजा करने के दौरान उन्हें किशोरों के भागने की जानकारी मिली। जिसके बाद पुलिस की मदद से पांचों किशोर पकड़ लिए गए।