पंच बदरियों में से एक श्री आदिबदरीनाथ मंदिर समूह के कपाट मकर संक्रांति (14 जनवरी) को ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्घालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। भगवान आदिबदरी नाथ की पूजा अर्चना के साथ ही नौ दिवसीय महाभिषेक समारोह शुरू होगा। मंदिर समिति ने समारोह को भव्य रूप देने का निर्णय लिया है। यहां वर्ष भर में एक माह (पौष) के लिए ही मंदिर के कपाट बंद होते हैं।
मंदिर समिति की रविवार को हुई बैठक में पंडित चक्रधर प्रसाद थपलियाल और विजय खंडूड़ी ने पंचांग देखकर मंदिर के कपाटोद्घाटन का समय तय किया। बताया कि मकर सक्रांति के अवसर पर भगवान आदिबदरी के कपाट सुबह 4.30 बजे श्रद्घालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
मंदिर समिति के अध्यक्ष विजयेश नवानी ने बताया कि कपाट खुलने के बाद भगवान आदिबदरीनाथ को सप्तसिंधु जल से स्नान कराने के बाद रोली कुमकुम और पीत वस्त्र सहित मुकुट के साथ श्रृंगार के बाद पंच ज्वाला आरती की जाएगी। इसके बाद श्रद्घालु भगवान आदिबदरी के श्रृंगार दर्शन कर सकेंगे।
मंदिर परिसर में गढ़वाल राइफल कीर्तन मंडप में श्रीमद्देवी भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में शिशु और चित्रकला प्रदर्शनी, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ धार्मिक विषयों पर व्याख्यानमाला का आयोजन होगा। बैठक में मुकेश खंडूड़ी, गुलाब सिंह, सुनील बहुगुणा, पूरन रावत, नंदा सिंह नेगी, बलवंत सिंह, गैणा सिंह, दीपक कठैत आदि मौजूद थे।
आयोजन के लिए समितियों का गठन
बैठक में मंदिर समिति ने विभिन्न आयोजनों के लिए समितियों का गठन किया। स्वागत समिति का प्रधान बैजंती देवी, त्रिलोक सिंह भंडारी, दीपा देवी और धर्म सिंह, सांस्कृतिक समिति में रघुवीर रावत, अनुष्ठानिक समिति में नरेंद्र चाकर, भुवन बरमोला और अशोक शाह को शामिल किया गया है।