आदिबदरीनाथ धाम के कपाट बुधवार को एक माह के लिए बंद होंगे। पौष माह की संक्रांति पर शाम सात बजे श्रद्धालुओं को भगवान आदिबदरीनाथ के निर्वाण दर्शन कराए जाएंगे।
फिर एक माह बाद माघ माह की संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए आदिबदरीनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। इस दौरान यहां बदरीनाथ की तर्ज पर वेद और ऋचाओं का पाठ होगा।
14 मंदिर समूहों के इस धाम में भगवान आदिबदरीनाथ (विष्णु) वरद मुद्रा में है। पुजारी चक्रधर थपलियाल बताते हैं कि वर्ष भर में मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं को दर्शनों के लिए खुले रहते हैं।
पंच बदरियों में आदिबदरी धाम ऐसा हैं जहां मंदिर के कपाट सबसे अंत में बंद होते हैं और महज एक माह बाद सबसे पहले खुलते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र चाकर बताते हैं कि संरक्षण की जिम्मेदारी संभाले पुरातत्व विभाग के अधीन इस मंदिर समूह में हर वर्ष हजारों की संख्या देशी-विदेशी श्रद्धालु आते हैं।
ये मंदिर हैं धाम में
आदिबदरी धाम 14 मंदिर समूहों का धाम हैं, जिनमें गरुड़ भगवान, हनुमान, जानकी, शिव, राम लक्ष्मण सीता, महिषासुर मर्दिनी, अन्नपूर्णा, विष्णु नारायण, चक्रवाहन, गणेश मंदिर आदि प्रमुख हैं।
कार्यक्रम एक नजर में
- प्रात: पांच बजे अंतिम श्रृंगार दर्शन व पूजा
- प्रात: नौ बजे अर्घ्य पूजा सूर्य उपासना
- प्रात: 10:30 मुख्य अतिथि अनुसूया प्रसाद मैखुरी करेंगे समारोह का शुभारंभ
- पूर्वाह्न11: 30 बजे क्षेत्रीय महिला मंगलों द्वारा भजन प्रस्तुति
- दोपहर 1: 00 बजे स्थानीय विद्यालयों के धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम
- अपराह्न तीन बजे से सामूहिक कीर्तन
- शाम सात बजे सामूहिक कड़ाह भोग पूजा और अंतिम निर्वाण दर्शन
पौराणिक धरोहर और सबसे सुगम धाम को तीर्थाटन के क्षेत्र में विकसित किया जाना चाहिए। इस मंदिर समूह को राज्य सरकार पर्यटन सर्किट से जोड़कर जहां स्वरोजगार को बढ़ावा दे सकती है वहीं प्रदेश की पौराणिक संस्कृति और धरोहर को विश्व स्तर तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।
- विजयेश नवानी, अध्यक्ष आदिबदरी मंदिर समिति