मानसून के दौरान डेंगू की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्वास्थ्य, शिक्षा, नगर निगम और सभी नगर निकायों को समन्वय के साथ व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। एहतियात के तौर पर स्कूलों में छात्र अगर पूरी आस्तीन की यूनिफॉर्म नहीं पहनते हैं तो स्कूलों के खिलाफ एपिडेमिक एक्ट में कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि डेंगू नियंत्रण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने नगर निगम और नगर निकायों को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव, नालियों की सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही जरूरत के अनुसार अतिरिक्त फॉगिंग मशीनें खरीदने को भी कहा। स्वास्थ्य विभाग को आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर सर्वे तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे के दौरान डेंगू के लार्वा की जांच, बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान, स्वास्थ्य परामर्श और संदिग्ध मरीजों की तत्काल जांच व उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
शिक्षण संस्थानों में डेंगू से बचाव को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए डीएम ने मुख्य शिक्षा अधिकारी, नगर निगम और नगर निकायों को सभी सरकारी व निजी विद्यालयों का निरीक्षण कर यह प्रमाणित करने के निर्देश दिए कि परिसर डेंगू की दृष्टि से पूरी तरह सुरक्षित हैं। विद्यालयों में कहीं भी जलभराव, गंदगी या मच्छरों के पनपने की स्थिति नहीं होनी चाहिए। मुख्य शिक्षा अधिकारी को यह भी सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए कि सभी छात्र-छात्राएं पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर स्कूल आएं, ताकि मच्छरों के काटने से बचाव हो सके। डीएम ने चेतावनी दी कि इन निर्देशों का पालन नहीं करने वाले विद्यालयों के खिलाफ एपिडेमिक एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
यह निदेश भी जारी
विद्यालय परिसर में कहीं भी पानी जमा न होने दिया जाए।
पानी की टंकियों, कूलर, गमलों, बाल्टियों आदि की नियमित रूप से सफाई की जाए और उन्हें ढककर रखा जाए।
प्रत्येक सप्ताह ड्राई डे मनाते हुए कूलर व पानी के सभी बर्तनों को पूरी तरह खाली कर साफ किया जाए।
विद्यालय परिसर की नियमित सफाई कर झाड़ियों व अनावश्यक कचरे को हटाया जाए।
प्रार्थना सभा में नियमित रूप से डेंगू से बचाव के उपायों की जानकारी छात्र-छात्राओं को दी जाए।
विद्यार्थियों के माध्यम से अभिभावकों को भी घरों में पानी जमा न होने देने के लिए जागरूक किया जाए।
विद्यालय प्रमुख समय-समय पर विद्यालय परिसर का निरीक्षण कर संभावित मच्छर प्रजनन स्थलों को तत्काल समाप्त कराएं।