कमीशन के चक्कर में रोगियों को बाहर की दवाएं लिखने वाले डाक्टर अब खेल नहीं कर पाएंगे। उत्तराखंड शासन ने इनकी घेराबंदी के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
सरकार की मुहर लगते ही यह आदेश जारी कर दिया जाएगा। प्रस्ताव में तीन परतों के रोगी परचे का सुझाव दिया गया है। एक परचा तो रोगी के पास रहेगा और इसकी दूसरी प्रति औषधि वितरण केंद्र में जमा होगी। तीसरी परत अभिलेख के रूप में अस्पताल में जमा कर रखी जाएगी। इनका हर तीन महीने में आडिट कराया जाएगा।
शासन ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के साथ रोगी परचों का प्रारूप और रंग भी फाइनल कर दिया है। सफेद रंग का परचा रोगी अपने पास रखेगा, लाल रंग का परचा औषधि वितरण केंद्र के फार्मासिस्ट के पास रहेगा और हरे रंग का परचा अभिलेख के रूप में अस्पताल के पास रहेगा। प्रस्ताव में तय कर दिया गया है कि डाक्टर जेनेरिक दवाएं ही लिखेंगे। प्रस्ताव में व्यवस्था की गई है कि किसी प्रकरण में ब्रांडेड दवा दिया जाना आवश्यक हो तो संबंधित डाक्टर अपने से कम से कम एक साल सीनियर डाक्टर से परामर्श लेगा।
सीनियर डाक्टर का परामर्श अनुमोदन के साथ तीन दिन के अंदर लिया जाना आवश्यक होगा। अस्पताल के अधीक्षक द्वारा रोगी परचे से संबंधित पुस्तिका जारी की जाएगी। जब यह पुस्तिका भर जाएगी तभी ओपीडी डाक्टर को दूसरी पुस्तिका जारी की जाएगी। रोगी परचा पुस्तिकाओं का हर तीन महीने में चिकित्सक वार आडिट किया जाएगा। सभी जिलों से आडिट पत्र महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को भेजा जाएगा। संबंधित जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी की वार्षिक प्रविष्टि के समय ने आडिट पत्रों का संज्ञान लिया जाएगा।