उद्योगपति समीर थापर समेत 16 लोगों के खिलाफ 26 वन अधिनियम में दर्ज मुकदमे में उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद एसीजेएम कोर्ट कोटद्वार ने राजीव खन्ना और जयंत नंदा का मुकदमा पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। अन्य 14 लोगों को हाईकोर्ट के आदेश की सत्यापित प्रति दाखिल करने के लिए 21 जनवरी तक का समय दिया गया है। पुलिस ने गत वर्ष लैंसडौन वन प्रभाग के रिजर्व फॉरेस्ट में वन कानूनों के उल्लंघन का मामला बताते हुए कोल्हूचौड़ फारेस्ट गेस्ट हाउस में नए साल का जश्न मनाने आए 16 लोगों को गिरफ्तार किया था।
अधिवक्ता शशिकांत बलूनी ने बताया कि पौड़ी पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमे और आरोपपत्र को उत्तराखंड हाईकोर्ट गत 23 अक्तूबर को खारिज कर चुका है। इस मामले के दो आरोपियों राजीव खन्ना और जयंत नंदा के मामले में सोमवार को हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति मय शपथपत्र कोटद्वार में एसीजेएम इंदु शर्मा की अदालत में दाखिल की गई। एसीजेएम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में उद्योगपति राजीव खन्ना और जयंत नंदा के विरुद्ध 26 वन अधिनियम के तहत चल रही फौजदारी की कार्रवाई को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। इस मामले के अन्य 14 आरोपियों को हाईकोर्ट के आदेश की प्रति दाखिल करने के लिए 21 जनवरी की तारीख दी गई है।
अधिवक्ता शशिकांत बलूनी ने बताया कि पौड़ी पुलिस ने गत वर्ष अप्रैल माह में इस मामले में एसीजेएम कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत किया था। तब उद्योगपति समीर थापर समेत अन्य आरोपियों के अधिवक्ताओं ने आरोपपत्र को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने पुलिस के आरोपपत्र को पर्याप्त साक्ष्यों का अभाव और इसे त्रुटिपूर्ण पाते हुए गत 23 अक्तूबर को खारिज कर दिया था। उन्होंने बताया कि इसी मामले से जुड़े संबंधित आरोपियों पर आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम का मुकदमा एसीजेएम कोर्ट में विचाराधीन है।