चाय बागान की सरकारी जमीन को भूमाफिया ने बड़े स्तर पर खुर्द-बुर्द किया है। नया खुलासा रायपुर मौजा की एक जमीन को लेकर हुआ है। इसमें जमीन के दस्तावेज स्कैन कर फर्जीवाड़ा किया गया। एक खसरे की एक ही जमीन को स्कैन कर दो लोगों को बेचा गया। आरटीआई कार्यकर्ता विकेश कुमार ने दस्तावेजों के जरिये यह दावा करते हुए कार्रवाई की मांग की है।
उनका कहना है कि रायपुर में खसरा नंबर 1600 की जमीन पद्मावती के नाम से थी। पद्मावती ने खसरा नंबर 1600 की 0.1540 हेक्टेयर जमीन शशिबाला को बेची। इस जमीन की वास्तविक रजिस्ट्री हुई। बही नंबर एक, जिल्द नंबर 16, रजिस्ट्री नंबर 264 पर 15 सितंबर 2010 को रजिस्टर्ड की गयी। इसके बाद इसी भूमि की वास्तविक रजिस्ट्री को स्कैन कर खुशी ट्रेडर्स के संचालक विनोद कुमार ने खसरा नंबर 1586 बताकर जितेंद्र कुमार के साथ मिलकर रजिस्ट्री करवा ली। इसके बाद विनोद कुमार ने इस भूमि की सेल डीड दीपचंद से अपने और अपनी पत्नी के नाम करवा दी। डीएम सोनिका का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री कार्यालय लगातार मांग रहा कार्रवाई का अपडेट
रजिस्ट्री विभाग में अभी कई जमीनों और अन्य मामलों में फर्जीवाड़ों की जांच चल रही है। यह मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संज्ञान में है। उन्होंने रिकॉर्ड रूम का खुद निरीक्षण कर प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के आदेश दिए थे। इसके बाद से लगातार सीएम कार्यालय मामले में प्रगति अपडेट ले रहा है। ऐसे अन्य मामलों का पता लगाकर इसमें ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।