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-नौ अक्तूबर 2022 को डोईवाला कोतवाली में दर्ज किया गया था मुकदमा
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I सौतेली बेटी से दुष्कर्म के आरोपी को स्पेशल पोक्सो जज अर्चना सागर की कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। कोर्ट में विचारण के दौरान पीड़िता की मां और पीड़िता के बयानों में विरोधाभास पाया गया। इसके साथ ही एफएसएल की रिपोर्ट में भी ऐसे कोई साक्ष्य नहीं पाए गए। जिससे आरोपी पर दोष सिद्ध हो पाता।
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Iघटना नौ अक्तूबर 2022 की बताई गई थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता आशुतोष गुलाटी ने बताया कि घटना के दिन ही पीड़िता की मां ने डोईवाला में मुकदमा दर्ज कराया था। महिला का कहना था कि वह रोजाना काम पर जाती है। उसकी गैरमौजूदगी में उसकी 12 वर्ष की बेटी और 10 वर्ष का बेटा घर में रहते हैं। महिला का दूसरा पति भी पास में ही एक दुकान पर काम करता था।
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Iमहिला ने अपने दूसरे पति पर आरोप लगाया था कि उसने उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। छह दिसंबर 2012 को आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पोक्सो अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी गई।
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Iइस मामले में जब कोर्ट में साक्ष्य रखे गए तो पता चला कि डीएनए सैंपलिंग के दौरान पीड़िता के कपड़ों से कोई ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जिसकी सैंपलिंग की जा सकती थी। ऐसे में डीएनए जांच में भी दुष्कर्म की बात सामने नहीं आई। इसके साथ ही पीड़िता की आंतरिक जांच भी नहीं की गई थी। यही नहीं मुकदमा दर्ज कराने वाली पीड़िता की मां के बयानों में भी विरोधाभास पाया गया।
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Iउधर, पीड़िता ने भी कहा कि उसका सौतेला पिता उसे खेलने से मना करता था। इस कारण उसका पड़ोसियों से झगड़ा हो गया था। इसी झगड़े के बाद पड़ोसियों के दबाव में यह मुकदमा दर्ज कराया गया था। इन सब आधार पर न्यायालय ने आरोपी को बरी कर दिया।I