पछवादून की सड़कों पर दुर्घटना का ग्रहण लग गया है। ढाई माह में 19 लोग जान गंवा चुके हैं। अधिकतर हादसों का कारण वाहनों की तेज रफ्तार रही है। इस पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
पछवादून के डाकपत्थर, विकासनगर, हरबर्टपुर, सहसपुर और सेलाकुई में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे अधिक हादसे अप्रैल माह में हुए, जिसमें 12 लोगों की मौत हुई थी। इसमें सिंहनीवाला में तेज रफ्तार बस के पलटने से एक छात्र, एक युवक की मौत के साथ 14 छात्रों के घायल होने जैसी बड़ी दुर्घटना शामिल है। अप्रैल में ही सेलाकुई की निगम रोड पर नशे में धुत नर्सिंग सहायक ने विद्यालय से घर लौट रहे 10 छात्र-छात्राओं को टक्कर मार दी थी। दुर्घटना में एक छात्र की अस्पताल में उपचार के 38वें दिन मौत हो गई थी। मई में सड़क दुर्घटना में कुछ कमी आई थी। इस दौरान दो सड़क दुर्घटनाओं में तीन लोगों की मौत हुई थी। लेकिन, जून में फिर से हादसों में इजाफा होने लगा। 14 जून तक सात लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
परिवहन विभाग ने अप्रैल से अब तक तेज रफ्तार पर 400 वाहनों के चालान किए हैं। इन सभी वाहनों के चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की गई है। परिवहन विभाग की स्पीड गन रोजाना सड़कों पर नजर आ रही है। लेकिन, विकासनगर कोतवाली पुलिस को मिली स्पीड गन कभी-कभी ही सड़कों पर निकाली जाती है। अगर, राष्ट्रीय राजमार्गों पर पुलिस भी स्पीड गन से गति की जांच कर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई करे तो दुर्घटनाओं में कमी आएगी।