उन्होंने कहा, भारत की 25 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या युवा है, यह हमारे लिए एक सांस्कृतिक वरदान है। जब युवा दृढ़ होकर खड़े होते हैं तो इतिहास की दिशा बदल जाती है। आप वही पीढ़ी हैं जो भारत का भविष्य लिखेगी। हमारे यहां विज्ञान और अध्यात्म साथ-साथ ज्ञान, संस्कार और सेवा के आधार पर चलते हैं। चंद्रयान-3 के माध्यम से दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत पहला राष्ट्र बना और ऐसे बहुत से मिशनों में हम विश्व को राह दिखा रहे हैं। आज अंतरिक्ष में भी भारत स्पष्ट कह रहा है कि अब हमारा समय है। बिना भय के नवाचार कीजिए, यही आपका धर्म है।
उन्होंने कहा कि हमें प्रतिदिन स्वयं से प्रश्न करना चाहिए कि हम राष्ट्र के लिए और उसकी एकता बनाए रखने के लिए क्या कर रहे हैं। भारत एक है और इसे एक रूप में बनाए रखना युवाओं की जिम्मेदारी है। जब हर हाथ में हुनर होगा, हर मन में विश्वास होगा और हर दिल में भारत होगा, वास्तविकता में वही विकसित भारत होगा। इस मौके पर एबीवीपी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डाॅ. रघुराज किशोर तिवारी, स्वागत समिति के अध्यक्ष व ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष डाॅ. कमल घनशाला समेत संगठन के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।