किसी व्यक्ति के आधार कार्ड की गोपनीयता भंग करना अब भारी पड़ सकता है। ऐसे व्यक्ति को ये बड़ी सजा मिलने का नया नियम बनाया जा रहा है।
जिसके तहत ऐसा करने पर तीन साल की जेल हो सकती है। इसको लेकर प्रदेश में एक्ट बनाने का काम शुरू हो गया है। सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने भी प्रदेश की आधार नीति का ड्राफ्ट तैयार कर वित्त विभाग को सौंप दिया है।
आवश्यक होने पर वित्त विभाग इसमें सुधार कर एक्ट को मंजूरी के लिए विधानसभा मेें भेजेगा। उम्मीद है कि विधानसभा के आगामी सत्र में आधार एक्ट को सदन में मंजूरी के लिए रखा जा जाएगा।
आधार एक्ट मनी बिल
आधार कार्ड
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केंद्र सरकार ने वित्तीय सेवाओं के साथ-साथ सब्सिडी की योजनाओं के लिए आधार कार्ड को जरूरी कर दिया है। इसको कानूनी रूप देने के लिए आधार एक्ट मनी बिल के रूप में संसद से पास करवाने के बाद इसे 26 मार्च 2016 को नोटीफाइड कर दिया गया है।
केंद्र का आधार एक्ट बनने के बाद सभी राज्य सरकारों को भी इस संबंध में एक्ट बनाने का निर्देश दिया गया। महाराष्ट्र और हरियाणा में आधार एक्ट बन चुका है। वहीं, उत्तराखंड में इसका ड्राफ्ट फाइनल कर लिया गया है।
आधार एक्ट के ड्राफ्ट में अधिकांश प्रावधान तो वहीं हैं जो केंद्र के एक्ट में है। मगर, राज्य के हिसाब से इसमें थोड़ा बहुत परिवर्तन किए गए हैं। इसमें आधार में दी गई जानकारी की गोपनीयता को बरकरार रखने पर खासा जोर दिया गया है।
अन्य संस्था या एजेंसी को बायोमीट्रिक जानकारी नहीं दी जाएगी
aadhar card
आईटीडीए के डायरेक्टर अमित कुमार सिन्हा के मुताबिक प्रदेश का आधार एक्ट बनाया जा रहा है। एक्ट का ड्राफ्ट तैयार कर वित्त विभाग को भेज दिया गया है।
ड्राफ्ट में केंद्र के एक्ट की तर्ज पर गोपनीयता पर जोर दिया गया है। इसमें आधार की जानकारी को सार्वजनिक करने की स्थिति में तीन साल सजा का प्रावधान किया है। कुछ मामलों में तो सजा की अवधि 10 साल भी हो सकती है।
उन्होंने बताया कि आधार कार्ड की बायोमीट्रिक डाटा बैंक की जानकारी सिर्फ भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के पास रहेगी। किसी अन्य संस्था या एजेंसी को बायोमीट्रिक जानकारी नहीं दी जाएगी।