घाट में औसतन 10 से 12 शव प्रतिदिन अंत्येष्टि संस्कार के लिए आते हैं। शवदाह के लिए शासन ने घाट के रास्ते में लकड़ी की टाल स्थापित की है। इसके संचालन का जिम्मा वन विकास निगम के पास है।
निगम टाल से 300 रुपये प्रति क्विंटल जलौनी लकड़ी उपलब्ध कराता है। वन विकास निगम की ओर से घाट में लगाए गए बोर्ड में जलौनी लकड़ी का मूल्य, टाल में कार्यरत कर्मचारियों का नाम और उनके मोबाइल नंबर तो लिखे ही हैं साथ ही यह भी लिखा है कि आधार कार्ड लाना अनिवार्य है।
इस संबंध में लकड़ी टाल प्रभारी दया कृष्ण तिवारी का कहना है कि जलौनी लकड़ी की रसीद मृतक के नाम से कटती है।
कई बार लोग मृतक का नाम और पता गलत लिखा देते हैं जिससे रसीद गलत कट जाती है और बाद में मृतक के परिजनों को मृत्यु प्रमाणपत्र आदि बनाने में दिक्कतें आती हैं।
ऐसा होने पर लोग फिर से रसीद में सुधार के लिए टाल में आते हैं। उन्होंने बताया कि लोगों को दिक्कतें न हों इसके लिए ही आधार कार्ड लाना जरूरी किया गया है। हालांकि उनका यह भी कहना था कि आधार कार्ड न होने की स्थिति में भी लोगों को जलौनी लकड़ी उपलब्ध कराई जाती है, इसमें किसी तरह की बाध्यता नहीं है।
बोर्ड में क्या लिखा गया है, यह मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो यह गलत है। जल्द ही बोर्ड से आधार कार्ड की अनिवार्यता संबंधी लाइन को हटवा दिया जाएगा।
-महेंद्र पाल सिंह रावत, क्षेत्रीय प्रबंधक वन विकास निगम कुमाऊं मंडल।