ग्राम पंचायत काशीरामपुर तल्ला गांव में गुलदार सुबह सवेरे धमक आया। एक महिला ने बहादुरी दिखाते हुए गुलदार को गोशाला में बंद कर दिया। वन विभाग 12 घंटे की मशक्कत के बाद भी गुलदार को पिंजरे में कैद नहीं कर पाया। खबर लिखने तक विभाग का रेस्क्यू जारी था।
बुधवार सुबह काशीरामपुर तल्ला में उस समय लोगों में अफरा-तफरी सी मच गई, जब सुबह करीब साढ़े सात बजे लैंसडौन वन प्रभाग के जंगल से निकलकर एक गुलदार काशीरामपुर में धमक आया।
मोहल्ले के बीच घूम रहे गुलदार पर नजर पड़ने पर दुकानदार ने शोर मचाया तो गुलदार पास में ही लक्ष्मी देवी के घर के पास गोशाला के बाहर बंधी गाय के पास धमक गया।
गुलदार पर की पत्थरों की बरसात
गुलदार को गाय के पास देखते ही लक्ष्मी देवी के होश उड़ गए। महिला ने शोर मचाया तो गुलदार वहां से भाग गया। उसने आस पड़ोस के लोगों को गुलदार को भगाने की बात बताई, लेकिन किसी ने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया। इतने में गुलदार फिर लौटा और उसने वहां बंधी गाय व उसके बछड़े पर हमला कर दिया।
65 वर्षीय लक्ष्मी देवी ने बहादुरी का परिचय देते हुए गुलदार पर पत्थरों की बरसात कर दी, जिससे वह वहां से भागकर पास में ही उसके मकान के बेसमेंट में बनी गोशाला में घुस गया।
लक्ष्मी देवी ने हिम्मत दिखाते हुए गोशाला का दरवाजा बंद कर गुलदार को गोशाला में कैद कर दिया। गुलदार की दहाड़ सुनकर गांव के लोग भी मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते गुलदार के गोशाला में बंद होने की खबर पूरे कोटद्वार में फैल गई।
गुलदार पर की पानी की बौछार
गुलदार को देेखने के लिए वहां लोगों का हुजूम लग गया। सूचना पर सुबह आठ बजे वन विभाग के लोग भी पहुंच गए। लेकिन, लोगों की भीड़ देखते हुए वे रेस्क्यू नहीं कर पाए। उसके बाद पुलिस ने पहुंचकर लोगों को वहां से हटाया।
डिप्टी रेंजर सतविंदर और दीपक कुमार ने निर्देशन में वन कर्मियों ने गोशाला का दरवाजा खोलकर उस पर पिंजरा लगा दिया, पिंजरे के अंदर पहले कुत्ता और बाद में बकरी रखी गई।
लोगों ने गोशाला के रोशनदान से गुलदार पर पानी की बौछार और लकड़ी से उसे बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन, गुलदार गोशाला में ही दुबका रहा। रात तक गुलदार पिंजरे में नहीं फंसा था।