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हिमालयी राज्यों में सरीसृपों का नए सिरे से हो रहा अध्ययन

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अरविंद सिंह। उत्तराखंड समेत देश के तमाम हिमालयी राज्यों मेें पाए जाने वाले सांप, छिपकली, कछुआ समेत तमाम सरीसृपों का नए सिरे से अध्ययन किया जा रहा। डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है।
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भारतीय वन्यजीव संस्थान के वन्यजीव विज्ञानियों की टीमें सरीसृपों के अध्ययन में जुट गई हैं। यह टीमें ऐसे सरीसृपों का पता लगा रही हैं, जो पर्यावरण में आए बदलाव समेत कई अन्य कारणों के चलते विलुप्त हो गए। साथ ही ऐसे सरीसृपों का भी पता लगाया जा रहा है, जिनके बारे में अब तक वैज्ञानिकों को कोई जानकारी नही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में सरीसृपों की संख्या 600 के आसपास है। इन सरीसृपों में सांप, छिपकली, मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुआ समेत कई अन्य सरीसृप शामिल हैं, लेकिन अब डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की ओर से नए सिरे से सरीसृपों का अध्ययन कराया जा रहा है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ सरीसृप विज्ञानी डॉ. अभिजीत दास ने बताया कि अध्ययन के दौरान उन सरीसृपों के बारे में भी जानकारियां जुटाई जा रही हैं, जो या तो विलुप्त हो गए हैं या फिर विलुप्त होने की कगार पर हैं। साथ ही पर्यावरण परिवर्तन की वजह से सरीसृपों के रहन-सहन व उनके व्यवहार में आए बदलावों का भी अध्ययन किया जा रहा है।
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