अपने 12 साल के बच्चे के हाथ का इलाज झोलाछाप डाक्टर से कराना काशीरामपुर मल्ला के एक परिवार को महंगा पड़ गया। हाथ को बचाने के लिए कोटद्वार से बिजनौर और देहरादून के चक्कर काटने और हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी हाथ को नहीं बचाया जा सका।
तीन दिन पहले डॉक्टरों को बच्चे के जीवन को बचाने के लिए खराब हाथ को काटना पड़ा। सिद्धबली गैस एजेंसी की संचालिका अनीता आर्य ने बच्चे के खराब हाथ का उपचार कराने में इस गरीब परिवार की पूरी मदद की।
काशीरामपुर मल्ला निवासी धर्मवीर मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करता है। उसने बताया कि 12 साल के बेटे कृष का करीब सात महीने पहले खेलने के दौरान दाहिना हाथ फ्रैक्चर हो गया था।
वे बच्चे को उपचार के लिए देवीरोड में एक झोलाछाप डॉक्टर के पास लेकर गए जिसने बच्चे के हाथ पर चूने का प्लास्टर बांध दिया। एक माह बाद जब प्लास्टर खोला गया तो हाथ सड़ गया था।