हलीमा का यह खत और सिंचाई सचिव की यह अपील अकारण नहीं है। हाल ही में सामने आई मानव विकास रिपोर्ट के मुताबिक 6-17 आयु वर्ग के बच्चों के बीच किए गए सर्वे में पाया गया कि प्रदेश में छात्रों के मुकाबले छात्राओं में ड्राप आउट रेट अधिक है। हलीमा का खत प्रदेश की इसी विडंबना की ओर इशारा कर रहा है।
कारगी की इस बिटिया ने खुद को इस विडंबना का शिकार होने से बचा लिया। खुद औलख के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने आदेश दिया था कि अधिकारी जिलों का भ्रमण भी करें। इसी आदेश के तहत उन्होंने अपने बच्चों को साथ में लेकर कारगी के सरकारी स्कूल का निरीक्षण किया। निरीक्षण में सामने आया कि 9वीं की एक छात्रा हलीमा स्कूल नहीं आ रही है।
पता किया तो सामने आया कि पिता बिटिया के स्कूल जाने से सहमत नहीं है लेकिन मां चाहती हैं कि बिटिया पढ़े। औलख ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बात की। अधिकारियों को हलीमा के घर भेजा तो पिता बिटिया को स्कूल भेजने पर सहमत हो गए।
मानव विकास रिपोर्ट के मुताबिक, 6-17 आयु वर्ग में कुल छात्रों में 5.25 स्कूल से बाहर पाए गए। इनमेें से 78.91 छात्र और 79.98 छात्राओें ने दाखिला लेने के बाद स्कूल छोड़ दिया। 2.39 प्रतिशत छात्राओं ने दाखिला लिया, लेकिन स्कूल की ओर रुख नहीं किया।
13.67 प्रतिशत छात्राएं दाखिला लेती ही नहीं। प्रदेश में एक से लेकर पांचवीं तक करीब 99 प्रतिशत बच्चे स्कूलों में दाखिला लेते हैं। छठवीं से लेकर आठवीं तक के बीच यह प्रतिशत गिरकर 87 प्रतिशत हो जाता है। 9वीं- 10वीं में यह 85 प्रतिशत रह जाता है और इसके बाद इंटर में यह प्रतिशत केवल 75 रह जाता है।