ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय अब हर महीने राजभवन को अपनी प्रगति रिपार्ट देंगे। यह निर्देश राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने बृहस्पतिवार को कुलपति सम्मेलन में दिए गए। राज्यपाल ने शासन में लंबित विश्वविद्यालयों के मामलों को तीन माह के भीतर निस्तारित करने के भी निर्देश दिए हैं।
राजभवन में आयोजित कुलपति सम्मेलन के दौरान राज्यपाल ने शोध कार्यों की गुणवत्ता जांच के लिए सचिव राज्यपाल की अध्यक्षता में समिति का गठन करने के भी निर्देश दिए। इस समिति में श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत, यूकॉस्ट के डॉ. राजेंद्र डोभाल और अपर सचिव उच्च शिक्षा डॉ. अहमद इकबाल शामिल होंगे। राज्यपाल ने बिना मानकों के चल रहे कॉलेजों की संबद्धता पर भी सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने कहा है कि ऐसे किसी भी कॉलेज की फाइल मानक पूरे होने से पहले राजभवन को न भेजी जाए। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। इसके अलावा सभी विश्वविद्यालयों को हर महीने अपनी समरी रिपोर्ट देने को कहा गया है। साथ ही विश्वविद्यालयों का एक कॉमन वेबपोर्टल बनाया जाएगा, ताकि सभी विवि एक मंच पर आ जाएं।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने चुने हुए रिसर्च के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में काम करना चाहिए। साथ ही विश्वविद्यालयों को नीति बनाने में भी सरकार की सहायता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि और बागवानी से संबंधित विश्वविद्यालयों को उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में किसानों की आय बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए। तकनीकी विवि को राज्य में स्टार्ट-अप उद्योगों के लिए मॉडल विकसित करने पर काम करने को कहा। उन्होंने विवि व कॉलेजों मेें सौर ऊर्जा व वर्षा जल संचयन पर काम करने को कहा। साथ ही उच्च शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि वह श्रीदेव सुमन विवि को नए पद सृजन की अनुमति जल्द प्रदान करे। सम्मेलन में परीक्षाओं, परिणाम और दीक्षांत समारोहों के कैलेंडर पर चर्चा की गई। सम्मेलन में सभी राजकीय विवि के कुलपति, अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह, ओम प्रकाश, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, डी. सेंथिल पांडियन एवं इंदुधर बौड़ाई भी उपस्थित रहे।
योग पढ़ने वालों के लिए खुलेंगे विदेशों में दरवाजे
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने दून विवि द्वारा आयुर्वेद विवि से समन्वय कर योग प्रशिक्षितों के लिए जर्मन, स्पैनिश, जापानी आदि विदेशी भाषाओं के कोर्स चलाने को कहा। इससे योग पढ़ने वाले युवाओं के लिए विदेश में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।