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तनावग्रस्त मरीजों को विशेष देखभाल की जरूरत

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तनावग्रस्त मरीजों को विशेष देखभाल की जरूरत
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे के उपलक्ष्य में कोरोनेशन अस्पताल में कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ न्यूरो साइकोलाजिस्ट डॉ. सोना कौशल गुप्ता ने अस्पताल के डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को अस्पताल में भर्ती मरीजों में तनाव का पता लगाने की जानकारी दी। ऐसे मरीजों को इलाज के साथ ही खास देखभाल की जरूरत होती है।
डॉ. कौशल गुप्ता ने बताया कि लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति ज्यादा देखने को मिलती है। एक तरफ गंभीर बीमारी की परेशानी तो दूसरी ओर साल दर साल खराब होती आर्थिक स्थिति कभी कभार मरीजों के आत्महत्या की वजह बनती है। ऐसे मरीजों के लक्षणों के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. सोना गुप्ता ने बताया कि अस्पतालों में भर्ती जो मरीज दिन में कई बार मरने की बात करें तो समझ लेना चाहिए कि स्थिति गंभीर है। ऐसे मरीजोें को परिजनों के साथ इलाज करने वाले डॉक्टरों व पैरामेडिकल की विशेष सहानुभूति की जरूरत होती है। ऐसे मरीजों को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उसके प्रति संवेदनशील रवैया अपनाते हुए बातचीत करके समस्याओं को सुलझाना चाहिए। यदि स्थिति ज्यादा ही गंभीर हो तो ऐसे मरीजों की विशेषज्ञ साइकोलाजिस्ट से काउंसिलिंग कराई जानी चाहिए।
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न्यूरो साइकोलॉजिस्ट डॉ. सोना कौशल गुप्ता ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में हर साल आठ लाख लोग विभिन्न कारणों से तनावग्रस्त होकर आत्महत्या करते हैं। इस लिहाज से हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति मौत को गले लगा रहा है। कार्यशाला में अस्पताल के सीएमएस डॉ. एलसी पुनेठा, संदीप शर्मा, डॉ. अजीत गैरोला, डॉ. अनुभा के अलावा अस्पताल के सभी डॉक्टर, नर्सिंग स्टॉफ व पैरामेडिकल उपस्थित थे।
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