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भाई के हत्यारे को उम्रकैद

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भाई के हत्यारे को उम्रकैद
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। संपत्ति विवाद में भाई की हत्या के आरोपी पर दोष सिद्ध होने पर अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर जिला जज (प्रथम) राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने दोषी पर पांच हजार का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर दो माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जबकि अदालत ने हत्या के दोषी को अपनी भाभी पर हमला व हत्या के प्रयास के आरोप से मुक्त किया है। घटना के बाद से वह सुद्धोवाला जिला कारागार में ही बंद है।
घटना कैंट थाना क्षेत्र के गोविंदगढ़ की है। अभियोजन पक्ष की अधिवक्ता जया ठाकुर ने बताया कि गोविंदगढ़ की आजाद कॉलोनी स्थित पैतृक मकान में अशोक कुमार अपने बड़े भाई देवेंद्र कुमार और छोटे भाई सुशील कुमार अन्य परिजनों के साथ रहते थे।
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मकान में कुल 12 कमरे हैं, जिनमें से तीनों भाई मौखिक बंटवारे के आधार पर चार-चार कमरों पर काबिज थे। काफी दिनों से छोटा भाई सुशील अन्य संपत्ति के बंटवारे की मांग कर रहा था। 20 मई 2014 को सुशील ने अशोक को आंगन में बुलाया और बंटवारा करने को कहा। इस पर अशोक ने भी हामी भर दी, लेकिन किसी बात को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया। इसी बीच सुशील अपने कमरे से चाकू लेकर आया और अशोक के सीने पर वार कर दिया। अशोक की पत्नी ममता उन्हें बचाने को आई तो सुशील ने उनकी जांझ पर भी वार कर घायल कर दिया। देवेंद्र और अन्य लोग अशोक और ममता को ऑटो रिक्शा से दून अस्पताल ले गए, जहां अशोक ने कुछ देर बाद ही दम तोड़ दिया। इसके बाद ममता की तहरीर पर थाना कैंट में हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया।
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लगभग 20 दिन बाद पुलिस ने मामले में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद सुशील के खिलाफ दोनों धाराओं में मुकदमा चलाया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाह पेश किए गए। इसके अलावा 18 लिखित साक्ष्य पेश किए गए। जिस पर शनिवार को अदालत ने फैसला सुना दिया। अदालत ने हत्या के दोष में सुशील को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि हत्या के प्रयास का आरोप सिद्ध नहीं हो पाया। अदालत ने माना कि ममता को जांघ पर चाकू मारा गया था, जिससे उसकी मृत्यु संभव नहीं थी।
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