निगम बनने के बाद अब वार्ड परिसीमन की तैयारी
-- शहरी विकास सचिव 40 वार्डों के गठन के पहले दे चुके हैं आदेश
-- प्रति वार्ड अधिकतम मतदाता संख्या 2700 रखने की दी है गाइडलाइन
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
ऋषिकेश को नगर निगम की अधिसूचना जारी होने के बाद निगम में बनने वाले 40 वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया में भी तेजी आएगी। वार्डों के गठन के लिए शहरी विकास सचिव अधिशासी अधिकारी को पहले ही आदेश जारी कर चुके हैं। जिनमें मतदाताओं की प्रति वार्ड अधिकतम संख्या 2700 हो सकती है। नगर पालिका ऋषिकेश को नगर निगम बनाने का प्रस्ताव कैबिनेट में मंजूरी के बाद शासन ने शुक्रवार को इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी। जबकि निकाय के सीमा विस्तार के बाद मर्ज होने वाली ग्रामसभाओं ऋषिकेश व वीरपुरखुर्द समेत शहर में 40 वार्ड गठित करने के आदेश अधिशासी अधिकारी को दिए गए थे। जिसकी परिसीमन की कार्यवाही गतिमान थी।
इस प्रक्रिया में अब और तेजी आने की पूरी संभावना है। लिहाजा इस तैयारी को अगले साल अप्रैल माह के बाद होने वाले नगर निकाय चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। शहरी विकास सचिव के आदेश के मुताबिक वार्डों का परिसीमन अधिकतम 2700 मतदाता के आधार पर किया जाना है। जिसमें वार्ड वार 15 फीसदी तक कमी भी हो सकती है। शासन से आदेश प्राप्त होने के बाद से ही निकाय प्रशासन वार्डों के गठन की कवायद में जुटा है। गौरतलब है कि सीमा विस्तार के बाद अब निकाय की कुल जनसंख्या करीब एक लाख 15 हजार पहुंच गई है।
मौजूदा वार्डों में फेरबदल की संभावना
ऋषिकेश। नगर निगम के लिए नए वार्डों के गठन के साथ शहर के पुराने वार्डों में भी फेरबदल की संभावना है। निकाय सूत्रों के मुताबिक इससे शहर के कई वार्डों के क्षेत्रों व आबादी में परिवर्तन हो सकता है। हालांकि, अभी वार्डों के सीमांकन और उनकी संख्या की फाइनल लिस्ट जारी नहीं हुई है।
क्या कहते हैं अधिकारी
शहरी विकास सचिव से वार्डों के गठन की प्रक्रिया से संबंधित आदेश प्राप्त हुआ है। इस पर कार्यवाही की जा रही है। वार्डों की आबादी को आदेशानुसार सूचीबद्ध किया जा रहा है। इसकी फाइनल सूची तैयार कर जल्द शासन को भेज दी जाएगी।
-- महेंद्र सिंह यादव, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका, ऋषिकेश।
एसडीएम को मिल सकता है चार्ज
ऋषिकेश। शहरी विकास सचिव ने नगर निगम की अधिसूचना जारी कर चार्ज जिलाधिकारी को सौंपा है। लेकिन डीएम ने इसके संकेत दिए हैं कि निगम का चार्ज वह एसडीएम को सौंप सकते हैं। हालांकि, अभी उन तक अधिसूचना और आदेश की कॉपी नहीं पहुंची है। डीएम ने बताया कि निगम का चार्ज पीसीएस को भी दिया जा सकता है। फाइल देखने के बाद इसपर निर्णय लिया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार का अधिकार है कि वह जन सुविधा के तहत कोई भी फैसला ले सकती है। शासन ने नगर पालिका को भंग कर निगम का दर्जा दिया है। यह अच्छा फैसला है, इससे नगर क्षेत्र में नागरिक सुविधाएं और ज्यादा डेवलप हो पाएंगी।
दीप शर्मा, निवर्तमान चेयरमैन, नगर पालिका, ऋषिकेश
राज्य सरकार ने इसमें देरी कर दी। सरकार को इससे पहले निकाय एक्ट के तहत चेयरमैन को बर्खास्त करना चाहिए था। पालिकाध्यक्ष पर भ्रष्टाचार के आरोप सिद्घ हुए हैं। उनके खिलाफ सरकार को कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
मनीष शर्मा, निवर्तमान सभासद, कांग्रेस।
सरकार ने बेहतर फैसला लिया है, लेकिन इससे पहले वित्तीय अनियमितताओं के दोषी चेयरमैन को बर्खास्त को किया जाना चाहिए था। नगर निगम बनने से स्थानीय नागरिकों को उम्दा सुविधाएं मिल पाएंगी।
शिवकुमार गौतम, निवर्तमान सभासद, भाजपा।
नगर निगम का गठन करना सही निर्णय है। लेकिन जीरो-टॉलेरेंस और डबल इंजन की सरकार को नगर पालिका में भ्रष्टाचार के मामलों में संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी।
हरीश तिवाड़ी, निवर्तमान सभासद।