नमामि गंगे योजना के तहत 885 करोड़ की लागत से गंगा सहित उत्तराखंड के 11 नदियों की दशा सुधारी जाएगी। वन विभाग ने इसके लिए वर्ष 2016-17 से लेकर 2020-21 तक की पंचवर्षीय डीपीआर तैयार की है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में 16 करोड़ के कार्य होंगे। प्रोजेक्ट में नदियों के किनारे बसे नगरों को भी शामिल किया गया है।
मंगलवार को रुद्रप्रयाग पहुंचे नमामि गंगे उत्तराखंड के परियोजना निदेशक संतोष विजय शर्मा ने अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने बताया कि राज्य में वन विभाग एफआईजी (फॉरेस्ट्री इंटरवेंसन ऑफ गंगा) के तहत तटबंधों के निर्माण के साथ स्नानघाट बनाने, हाईवे, पैदल रास्तों और नदियों के किनारे बसे नगरों में विभिन्न प्रजातियों के फूल और पौधरोपण का काम करेगा।
आपदा और अन्य कारणों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए 200 हेक्टेयर भूमि को संरक्षित किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गंगा और सहायक नदियों के किनारे बसे नगरों में गंगा वाटिकाएं स्थापित की जाएंगी। मेरा वृक्ष मेरा धन योजना के तहत वन विभाग 45 हजार फलदार पौधे, जिनमें सेब, आडू, अखरोट और खुमानी के पौधे शामिल हैं, काश्तकारों को बांटेगा।
परियोजना निदेशक ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को योजना की तकनीकी जानकारी दी। इन कार्यों के लिए वन विभाग ने 21 प्रभागों को जिम्मेदारी सौंपी है।