देहरादून। पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूडी ने कहा कि डेंजर जोन में होने के कारण उत्तराखंड में दैवी आपदाओं का खतरा सबसे ज्यादा है। ऐसे में जन मानस को जागरूक कर आपदा की क्षति को कम किया जा सकता है। एसडीआरएफ के जवानों ने विषम परिस्थितियों में यह साबित किया है कि प्रदेश के जनमानस को हर हालत में राहत देने को तैयार है।
डीजीपी रतूडी ने मंगलवार को पुलिस लाइन में एसडीआरएफ की ओर से आयोजित एक दिवसीय आपदा जागरुकता मेले का शुभारंभ किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ एसडीआरएफ की फोटो गैलरी और अत्याधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ ही एसडीआरएफ के जवानों से उपकरणों के प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान अपने संबोधन में डीजीपी ने कहा कि उत्तराखंड में पहले भी कई आपदाएं आई हैं, लेकिन 2013 में केदारघाटी में आई आपदा से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। इस आपदा के बाद एसडीआरएफ गठन कीपरिकल्पना हुई। एसडीआरएफ की चार कंपनियों ने प्रदेश में ही नहीं देश भर में अपनी क्षमताओं और कार्यों से अलग पहचान बनाई है। कई राज्याें ने एसडीआरएफ को रोल मॉडल की तरह लिया है।
डीजीपी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा को कंट्रोल तो नहीं किया जा सकता है, लेकिन लोगों को प्रशिक्षित कर हानि को कम किया जा सकता है। भूकंप अलर्ट की तकनीक पर काम चल रहा है। उम्मीद है कि कुछ सेकेंड पहले भूकंप पर अलार्म जारी होने लगेगा। प्रत्येक व्यक्ति को यह जानकारी होने चाहिए कि भूकंप आने की स्थिति में उन्हें क्या करना है, किस तरह जनहानि को कम किया जा सके।एसडीआरएफ की सेनानायक तृप्ति भट्ट ने कहा कि आपदा जागरूकता मेले के माध्यम से छात्र-छात्राआें को आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया गया है, ताकि वह अपने परिजनों को भी जागरूक कर सकें। कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) अशोक कुमार, एडीजी प्रशासन वी विनय कुमार, आईजी एपी अंशुमन, आईजी कानून व्यवस्था दीपम सेठ, आईजी गढ़वाल अजय रौतेला, आईजी होमगार्ड पुष्पक ज्योति, डीआईजी यातायात केवल खुराना, डीआईजी कार्मिक जगतराम जोशी आदि उपस्थित थे।
छात्र-छात्राओं को सिखाए राहत और बचाव के गुर
आपदा जागरुकता मेले में 43 स्कूलों के लगभग सात हजार छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। मेले में कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें राहत और बचाव के गुर सिखाए गए। भूकंप मॉकड्रिल कराने के साथ छात्र-छात्राआें को प्राथमिक चिकित्सा के बारे में बताया गया। जादूगर ने भी अपने करतबों से बच्चों में आपदा के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास किया। उत्तराखंडी नृत्य, नुक्कड़ नाटकों ने भी बच्चों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। वहीं फोटो गैलरी के माध्यम से एसडीआरएफ के सामाजिक कार्यों, बर्फीले क्षेत्राें में रेस्क्यू, चारधाम यात्रा, कैलाश मानसरोवर यात्रा, नंदा देवी राजजात यात्रा में योगदान को प्रदर्शित किया गया।
गर्मी से बिलबिलाए स्कूली बच्चे
आपदा जागरूकता मेले के दौरान भीषण गर्मी के कारण विभिन्न स्कूल के छात्र-छात्राएं बिलबिला गए। मेले में हजारों बच्चों के आने के कारण जगह कम पड़ गई थी। कई स्कूलों के बच्चों को तो वापस भेजना पड़ा। पानी का इंतजाम तो था, लेकिन गर्मी के कारण हालत ये रही कि काफी बच्चे एसडीआरएफ द्वारा उपलब्ध कराई फाइल से हवा करते रहे।