छात्रवृत्ति घोटाले में पूछताछ के लिए तलाशे जा रहे पूर्व समाज कल्याण अधिकारी अपने मूल जनजाति विभाग से भी गायब हो गए। वे 20 अप्रैल तक छुट्टी पर थे, लेकिन पांच दिन बाद भी नहीं लौटे। इस पर विभाग ने उन्हें तीन नोटिस भी जारी किए हैं, जिनमें से दो लौट आए हैं। जबकि, तीसरा नोटिस उनके गृह जनपद बदायूं भेजा गया है। हालांकि, इसका भी कोई जवाब अभी तक नहीं आया। अब विभाग एक सप्ताह बाद उनकी तलाश के लिए प्रचार माध्यमों में सूचना प्रकाशित करवाएगा।
अनुराग शंखधर का नाम छात्रवृत्ति घोटाले में आया है। ऐसे में माना जा रहा है कि वे कार्रवाई के डर से भूमिगत हो गए हैं। इधर, अनुराग के इस तरह गायब होने से विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग उन्हें नोटिस पर नोटिस भेज रहा है। लेकिन, इनका जवाब आने के बजाय ये बिना तामिल हुए वापस लौट रहे हैं।
जनजाति कल्याण विभाग के निदेशक बीआर टम्टा ने बताया कि अनुराग शंखधर 20 अप्रैल तक अवकाश पर थे। लेकिन, वापस नहीं लौटे। उसने संपर्क करने की भी कोशिश की। लेकिन, उनके फोन नंबर भी बंद हैं। जिसके बाद विभाग की ओर से उनके दून आवास पर नोटिस भेजा गया। लेकिन, वह लौट आया। इसके बाद हरिद्वार निवास पर दूसरा नोटिस भेजा गया। वह भी वापस आया।
टम्टा ने बताया कि अब उनके गृह जनपद बदायूं में तीसरा नोटिस भेजा गया है। यदि इसका एक सप्ताह में जवाब नहीं आता तो प्रचार माध्यमों में सूचना प्रकाशित करवाकर गुमशुदा की तरह तलाश की जाएगी। दरअसल, करीब दो माह पहले पूर्व समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर ने शासन को पत्र भेजकर अपने मूल कैडर जनजाति विभाग में भेजने का अनुरोध किया था। उसके बाद उन्हें जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद से हटाकर मूल विभाग में भेज दिया गया था।