उत्तरकाशी। विस्थापन के मुद्दे को लेकर नेलांग एवं जाढ़ूंग के ग्रामीणों द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखे जाने के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया। शुक्रवार को एसडीएम भटवाड़ी ने इन गांवों से विस्थापित ग्रामीणों एवं आईटीबीपी के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने ग्रामीणों को समुचित मुआवजा भुगतान को लेकर शासन को रिपोर्ट प्रेषित करने पर सहमति जताई।
वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान सीमावर्ती नेलांग एवं जाढ़ूंग गांव खाली करा दिए गए थे। इसके एवज में ग्रामीणों को थोड़ा बहुत मुआवजा दिया गया। तब से यह ग्रामीण समुचित मुआवजे के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। बीते सात नवंबर को सेना एवं आईटीबीपी के जवानों के साथ दीपावली मनाने हर्षिल पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन ग्रामीणों को न्याय का भरोसा दिलाया था। इस पर ग्रामीणों ने बीते दिनों प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। शुक्रवार को एसडीएम भटवाड़ी देवेंद्र नेगी ने प्रभावित ग्रामीणों तथा आईटीबीपी के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें ग्रामीणों ने नेलांग एवं जाढ़ूंग गांव को पुन: आबाद कर उन्हें वहां बसाने, टिहरी बांध प्रभावितों की तर्ज पर विस्थापित करने या फिर उन्हें उनके मकान एवं जमीनों का समुचित मुआवजा देने की मांग की। इस पर एसडीएम ने ग्रामीणों की मुआवजे की मांग से शासन को अवगत कराकर इस पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। मौके पर आईटीबीपी के सहायक सेनानी देवेंद्र कुमार, बगोरी गांव के प्रधान भवान सिंह राणा, जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष दलवीर नेगी, मदन राणा, शिवराम रावत, उत्तम रावत, कमल सिंह, जसराम, विशन नेगी आदि मौजूद रहे।