ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
खैर के पेड़ काटने हरिद्वार आए तस्करों का लिंक उत्तरप्रदेश के रामपुर जिले के पीपली जंगलों तक पहुंच गया है। हरिद्वार वन प्रभाग के पास भी कई वन तस्करों के नाम सामने आए हैं। इनमें ऊधमसिंह नगर के तस्करों के नाम भी शामिल हैं, लेकिन हरिद्वार वन प्रभाग अभी इस प्रकार की कोई जानकारी होने से इनकार कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की सीमा उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर से लगती है। कई वर्षों से रामपुर के पीपली जंगल में बड़े पैमाने पर वन तस्कर सक्रिय हैं, जो जगंल से खैर सहित अन्य पेड़ों का बड़े पैमाने पर अवैध कटान कर उत्तराखंड की सीमा में आकर विभिन्न राज्यों में लकड़ी सप्लाई करते हैं। पीपली जंगल के समीप कलकत्ती नाम का एक गांव है, जो गदरपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। कलकत्ती गांव में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से हथियार बनाए जाते हैं। गांव के लोग भी वन तस्करों से साथ मिले हुए हैं। कई ग्रामीण ही बड़े पैमाने पर खैर के पेड़ों को काटकर बेच देते हैं। कुछ समय पूर्व बाजपुर और गदरपुर पुलिस कलकत्ती गांव गई तो ग्रामीणों ने पुलिस को घेर लिया। ग्रामीणों और पुलिस के बीच कई राउंड फायरिंग हुई। तराई केंद्र वन प्रभाग के सूत्रों की मानें तो पीपली जंगलों से लकड़ी ऊधमसिंह नगर के विभिन्न क्षेत्रों में लाई जाती है और यहां वाहनों से नोएडा, दिल्ली, हरियाणा सहित विभिन्न स्थानों पर लकड़ी सप्लाई की जाती है। गिरोह बड़ा होने और वनकर्मियों के सांठगांठ होने के कारण अधिकांश बार तस्कर फरार हो जाते हैं। हरिद्वार में कई बार खैर के पेड़ों को काटने का मामला सामने आ चुका है। रविवार को चंडी पुल के नीचे 15 खैर के पेड़ काटे गए थे। इनमें विभाग के पास कुछ वन तस्करों का नाम शामिल है, जो ऊधमसिंह नगर का गिरोह बताया जा रहा है।
लोकल गिरोह भी है शामिल
पीपली जंगलों के वन तस्करों की पहुंच हरिद्वार तक पहुंच गई है। हरिद्वार के भी कई वन तस्कर इस गिरोह में शामिल हैं, जबकि गदरपुर का एक गिरोह हाल ही में पीपली जंगल के वन तस्करों के साथ शामिल हुआ है। सूत्रों की मानें तो हरिद्वार के भी कई वनकर्मी तस्करों के साथ मिले हुए हैं।
एक साल में पकड़े गए हैं आठ तस्कर
तराई केंद्रीय वन प्रभाग की एसओजी टीम ने पीपली जंगलों में सक्रिय करीब आठ वन तस्करों को बीते एक साल में पकड़ा है। 11 से अधिक अवैध लकड़ियों से वाहनों को सीज किया जा चुका है।
कोट:
पीपली जंगल के कई वन तस्कर सक्रिय हैं। लगभग आठ तस्करों को पकड़कर जेल भेज चुके हैं। गदरपुर का एक लोकल गिरोह भी सक्रिय है। हरिद्वार वन प्रभाग द्वारा वन तस्करों को चिन्हित करने पर उनका सहयोग किया जाएगा।
- आरएन गौतम, प्रभारी एसओजी, तराई केंद्रीय