योजना धरातल पर उतारें अधिकारी : पंत
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य सरकार की ओर से आयुष्मान भारत योजना को अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तौर पर लागू करने और योजना का लाभ राज्य के 22 लाख परिवारों को देने संबंधी फैसले पर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने उत्तराखंड सरकार के इस फैसले को सराहनीय कदम बताया है। कहा कि अब योजना को धरातल पर उतारने के लिए जुटना होगा। संयुक्त सचिव सुंधाष पंत ने बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों के साथ ही बैठक कर योजना की तैयारियों की समीक्षा की।
संयुक्त सचिव पंत ने कहा कि केंद्र पोषित योजनाओं में आयुष्मान भारत योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बाद स्वास्थ्य के क्षेत्र में संचालित होने वाली दूसरी सबसे बड़ी योजना है। सामाजिक एवं आर्थिक सर्वे के आधार पर लागू की गई यह योजना लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में कारगर साबित होगी। संयुक्त सचिव ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना मूलत: साल 2011 में सामाजिक, आर्थिक एवं जातीय जनगणना में चिन्हित परिवारों के लिए लागू की गई है, जिसके अनुसार राज्य में 5.37 लाख परिवारों को पांच लाख रुपये तक नि:शुल्क इलाज की सुविधा दी जानी है। इस योजना में 90 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार की ओर से मुहैया करायी जाएगी, जबकि 10 फीसदी अंशदान राज्य सरकार को करना होगा।
नोडल अधिकारी एवं अपर निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना को राज्य में संचालित करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। योजना को ट्रस्ट की तरह संचालित किया जाएगा। इसके लिए अपर सचिव (स्वास्थ्य) को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नामित किया गया है। पात्र परिवारों को योजना में शामिल करने के लिए लगभग 87 फीसदी परिवारों का डाटा कंप्यूटर में फीड कर दिया गया है। शत-प्रतिशत सत्यापन के लिए केंद्र सरकार से समय मांगा गया है। डॉ. नैथानी ने कहा कि इसके लिए कुमाऊं मेें 42 सरकारी और गढ़वाल मंडल में 55 सरकारी अस्पतालाें को सूचीबद्ध कर लिया गया है। इसके अलावा आठ बडे़ निजी अस्पतालोें व तीन मेडिकल कॉलेजों को भी सूचीबद्ध किया गया है।
बैठक में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. टीसी पंत, निदेशक डॉ. अमिता उप्रेती, डॉ. अंजलि नौटियाल, वित्त निदेशक शैलेंद्र शंकर सिंह, अपर परियोजना निदेशक बंशीधर तिवारी, नोडल अधिकारी डॉ. सरोज नैथानी समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।