उत्तरकाशी। पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी के साथ सीमांत जनपद उत्तरकाशी की भी कई यादें जुड़ी हुई हैं। प्रधानमंत्री बनने से पूर्व दो बार उत्तरकाशी जिले के दौरे पर पहुंचे वाजपेयी जी को देश का प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद भी गंगा के उद्गम गंगोत्री धाम में मिला था। उनका सानिध्य पाने वाले जिले के पुराने जनसंघी और भाजपाई उनके साथ बिताए पलों को याद कर भाव विह्वल हो गए। अलग उत्तराखंड राज्य बनाने के साथ ही वर्ष 2003 में वरुणावत त्रासदी से निपटने के लिए उनके द्वारा ढाई सौ करोड़ के भारी भरकम पैकेज की घोषणा किए जाने से जनपदवासी आज भी उनके ऋणी हैं।
पुराने जनसंघी नेमचंद चंदोक, सूरतराम नौटियाल, सत्यदेव गुप्ता आदि ने बताया कि वर्ष 1985 में ग्वालियर सीट से लोकसभा चुनाव में पराजय का सामना करने के बाद वाजपेयी जी नवंबर माह में उत्तरकाशी के दौरे पर आए थे। नौटियाल बताते हैं कि एक मारुति वैन में वाजपेयी जी के साथ उनके निजी सहायक शिव कुमार एवं सुरेश चंद जैन यहां आए थे। यहां उन्होंने सत्यदेव गुप्ता-सुधा गुप्ता के घर पर भोजन किया था और रामरतन तलवाड़ के घर नाश्ता किया था। यहां से वे हर्षिल गए, जहां उन्होंने सेब के पेड़ों के साथ फोटो खिंचाने के साथ ही विल्सन का बंगला भी देखा था। गंगोत्री मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मंदिर समिति के तत्कालीन सचिव रावल कमलेश कुमार सेमवाल ने वाजपेयी जी को देश का प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद दिया था। तब फोटो बाबा स्वामी सुंदरानंद ने भी उनकी तस्वीर कैमरे में कैद की थी। स्वामी सुंदरानंद भी उनके मुरीद थे। इस दौरान तीर्थ पुरोहितों द्वारा भूमि बंदोबस्त की मांग किए जाने पर उन्होंने अलग पर्वतीय राज्य की बात कही थी। लौटते हुए उन्हें भटवाड़ी के रामलीला मैदान में एक सभा को भी संबोधित किया था।
दूसरी बार वाजपेयी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर 21-22 मई 1988 में उत्तरकाशी का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने आजाद मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित किया था। तब उनके साथ भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कल्याण सिंह भी यहां आए थे। भ्रमण के दौरान उन्होंने जीएमवीएन गेस्ट हाउस में प्रख्यात फोटोग्राफर गुलाब सिंह नेगी द्वारा लगाई गई फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन कर विजिटर बुक में सराहना की थी। इसके बाद उनका उत्तरकाशी आना नहीं हुआ, लेकिन इस जिले से लगाव ही था कि वर्ष 2003 की वरुणावत त्रासदी से वे खासे व्यथित हुए और देहरादून दौरे के समय उन्होंने इस त्रासदी से निपटने के लिए ढाई सौ करोड़ रुपये के भारी भरकम पैकेज की घोषणा की थी।
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अलग उत्तरांचल की राह प्रशस्त हुई
बड़कोट। यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत ने बताया कि आठ नवंबर 1985 में बड़कोट दौरे के समय क्षेत्र की जनता ने वाजपेयी जी को सिक्कों से तोला था। अगली बार वर्ष 1988 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर उनका बड़कोट दौरा अलग उत्तरांचल राज्य के गठन की राह प्रशस्त कर गया। भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष स्व. राजेंद्र सिंह रावत ने वर्ष 1987 में पार्टी की नीति और सहमति के बगैर ही अलग उत्तराखंड राज्य की मांग के लिए साढ़े पांच माह तक धरना आंदोलन चलाया था। वर्ष 1988 में तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कल्याण सिंह के साथ बड़कोट पहुंचे वाजपेयी जी ने इसके लिए स्व. राजेंद्र सिंह रावत का फटकार लगाई थी, लेकिन उनकी मांग पर सहमति जताते हुए उसी साल नवंबर में पार्टी की जम्मू में हुई बैठक में अलग राज्य का प्रस्ताव पारित किया और प्रधानमंत्री बनते ही राज्य के लोगों की चिर प्रतीक्षित मांग पर मुहर लगाई। ब्यूरो