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गोपालदास नीरज : स्मृति शेष ...जब गोपालदास नीरज को देहरादून से जाना पड़ा

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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मशहूर कवि एवं गीतकार गोपालदास नीरज को एक समय देहरादून छोड़कर भागना पड़ा था। उस वक्त देश में अंग्रेजों की हुकूमत थी। एक कविता लिखने पर अंग्रेजी सरकार ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। गोपालदास नीरज का आजादी से पहले ही देहरादून से खास जुड़ाव रहा है। कुछ साल पहले तक भी वह दून आते रहे हैं। बृहस्पतिवार को उनके निधन से देहरादून के कवियों और साहित्यकारों में शोक की लहर दौड़ गई।
कवि एवं गीतकार गोपालदास नीरज का दून से पुराना नाता रहा है। उन्होंने एक लेख में अपनी कविता, ब्रिटिश हुकूमत की बेरुखी और दून से भागने की वजह बताई थी। उन्होंने वर्ष 1942 में एक कविता लिखी थी, ‘मैं विद्रोही हूं जग में विद्रोह करने आया हूं, बहुत कुछ बदल गया है, चाहे शोर समय का या जोर हवाओं का’। इस कविता को अंग्रेजी हुकूमत ने देश विरोधी माना। उन्होंने माना कि इससे आजादी की चिंगारी भड़क सकती है। इसलिए सरकार ने गोपालदास नीरज के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। आखिरकार उन्हें देहरादून छोड़कर जाना पड़ा था। साहित्यकार डॉ. इंद्रजीत सिंह का कहना है कि गोपालदास नीरज का दून से इतना प्रेम था कि जब भी मौका मिलता, वह यहां जरूर आते थे। उन दिनों भी वह देहरादून के प्रवास पर आए थे।
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भले ही अंग्रेजी हुकूमत की वजह से उन्हें यहां से जाना पड़ा, लेकिन आजादी के बाद वह कई मर्तबा देहरादून आए। वर्ष 2009 में शैलेंद्र सम्मान में गोपालदास नीरज बतौर मुख्य अतिथि आए थे। इस समारोह में उन्होंने अपने हाथों से गीतकार प्रसून जोशी को सम्मानित किया था। इससे गोपालदास नीरज को वर्ष 2002 में शैलेंद्र सम्मान रुड़की में दिया गया था। डॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि दिल की कलम से जैसे गीत लिखने वाले गोपालदास नीरज का शून्य में विलीन होना कभी न पूरी होने वाली क्षति है। राजधानी के अन्य साहित्यकारों ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
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फिल्मों में साहित्य गीत पर किताब निकालना चाहते थे गोपालदास
डॉ. इंद्रजीत ने बताया कि कुछ दिन पहले उनकी फोन पर गोपालदास नीरज से बात हुई थी। वह चाहते थे कि फिल्मों में साहित्य गीत विषय पर पुस्तक लिखी जाएगी। उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्मों में जो गीत हैं, उनमें कई कविताएं हैं। उन्हें अलग से छांटकर उनकी पुस्तक लिखी जाए। हालांकि उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया।
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(फोटो)
1995 में डीएवी में बांधा था समां
कवि एवं गीतकार गोपालदास नीरज वर्ष 1995 में डीएवी पीजी कॉलेज आए थे। कॉलेज प्राचार्य डॉ. अजय सक्सेना ने बताया कि वह छात्रसंघ समारोह में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में आए थे। उन्होंने अपनी कविताओं से ऐसा समां बांधा था कि देर तक तालियों से उनका स्वागत किया गया था।
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