ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था बेपटरी होती जा रही है। कांवली, इंदिरापुरम, विद्या विहार समेत कई वार्डों में हफ्ते में एक-दो दिन ही कर्मचारी कूड़ा उठाने पहुंच रहे हैं। नगर निगम के अधिकारियों ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए उसे पीपीपी मोड में देने का निर्णय तो लिया, लेकिन छह बाद भी कंपनी के साथ एमओयू साइन नहीं हुआ है। इसका खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
वर्तमान में नगर निगम भार्गव एजेंसी के कर्मचारियों से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करा रहा है। बीते एक महीने से शहर के कई वार्डों में पूरी तरह कूड़ा कलेक्शन नहीं हो रहा है। इससे कूड़ा घरों में सड़ रहा है। लोगों ने सफाई निरीक्षकों से इसकी शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। नगर निगम ने पिछले वर्ष अक्तूबर में कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए इसे पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) पर देने का निर्णय लिया। इसका टेंडर चेन्नई की एमएसडब्ल्यू कंपनी को दिया गया। जनवरी में नगर निगम और कंपनी के बीच एमओयू साइन होना था, जो अभी तक नहीं हो सका। निगम के अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि पीपीपी मोड में कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था शुरू होने के बाद लोगों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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अगस्त से पीपीपी मोड में होगा कूड़ा कलेक्शन
अपर नगर आयुक्त नीरज जोशी के मुताबिक, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन अगस्त से पीपीपी मोड के जरिये होगा। इसके बाद एजेंसी कर्मियों की हड़ताल और उनके रोजाना कूड़ा नहीं उठाने की समस्या से लोगों को निजात मिलेगी।
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इस सप्ताह चेन्नई एमएसडब्ल्यू कंपनी के साथ एमओयू साइन हो जाएगा। जो कर्मचारी डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन नहीं कर रहे हैं, उन्हें कंपनी में समायोजित नहीं किया जाएगा।
-विजय कुमार जोगदंडे, नगर आयुक्त