यह किसी ने कल्पना भी नहीं कि होगी कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में 1982 में टाटपट्टी पर शुरू हुआ योग चौथे दशक में ही दुनिया पर छा जाएगा। आज दुनिया के अधिकांश छोटे-बड़े देश में गुरुकुल कांगड़ी विवि के छात्र योग का पाठ पढ़ा रहे हैं। विदेशों में नहीं भारत में ऐसे बहुत कम संस्थान ही होंगे जहां गुरुकुल के योगाचार्य शिक्षा न दे रहे हों।
गुरुकुल कांगड़ी विवि में पहली बार प्रो. ईश्वर भारद्वाज के प्रयास से 1982 में योग को एक सर्टिफिकेट कोर्स के शुरू किया गया था। योग के महत्व को देखते हुए इसके एक साल बाद ही योग को बीए में एक विषय के रुप में शुरू कर दिया गया। 1991 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पहली बार गुरुकुल कांगड़ी विवि को एमए योग का पाठ्यक्रम चलाने की स्वीकृति दी। इसके एक साल बाद विवि में एमए योग का पाठ्यक्रम शुरू कर दिया गया। भारत की प्राचीन विद्या योग को आगे बढ़ाते हुए देश के पहले विश्वविद्यालय गुरुकुल कांगड़ी में 1996 में पीएचडी का पाठ्यक्रम शुरू किया गया।
गुरुकुल कांगड़ी विवि में मानव चेतना एवं योग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सुरेंद्र त्यागी ने बताया कि विवि में एक विदेशी सहित 22 भारतीय छात्र योग में पीएचडी कर रहे हैं। साथ ही एमए और पीजी डिप्लोमा योग में 120, बीए में 225 और सर्टिफिकेट कोर्स में 120 छात्रों को योग का पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है।