जबकि, 60-70 हजार मतदाताओं (विभिन्न आयु वर्ग के) के नाम सूची में शामिल किए जाने हैं। उन्होंने बताया कि डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम काटने और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के बाद ही प्रोजेक्ट पॉपुलेशन और मतदाताओं की संख्या के अंतर को समाप्त किया जा सकता है।
पहले भी 70 हजार लोगों के काटे जा चुके हैं नाम
डुप्लीकेट मतदाताओं की पड़ताल के बाद दिसंबर-2019 में भी करीब 70 हजार लोगों के नाम काटे जा चुके हैं। अभी महिलाओं की संख्या का गणित भी फिट नहीं बैठ रहा है। प्रोजेक्ट पॉपुलेशन के अनुसार 1000 पुरुषों पर 902 महिलाएं हैं। जबकि, वर्तमान की फोटो युक्त नामावली (वोटर लिस्ट) के अनुसार यह संख्या केवल 887 है। इस 15 महिलाओं के अंतर को भी ठीक किया जाना है।