ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
अपनी जमीन पर दूसरे का कब्जा हटवाने में अब दशकों का समय नहीं लगेगा। प्रदेश में बन रही राजस्व संहिता में इस तरह की व्यवस्था की जा रही है कि इन मामलों को राजस्व न्यायालय एक निर्धारित समय में निस्तारित कर सकें। राजस्व संहिता अगले साल तक अस्तित्व में आ सकती है। इसके लिए प्रत्येक जिले से सुझाव मांगे जा रहे हैं। देहरादून जनपद से भी कई प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं।
दरअसल, किसी की संपत्ति पर कब्जे संबंधी विवाद को निपटारे का वर्तमान में भी तीन माह का समय निर्धारित है। इसे जिला मजिस्ट्रेट तीन माह के भीतर कब्जा दिलाने संबंधी आदेश दे सकते हैं, लेकिन तीन माह के भीतर यदि संपत्ति का मूल मालिक अपना पक्ष नहीं रख पाता है तो यह मामले सिविल न्यायालयों में चले जाते हैं। शहर से बाहर या विदेश में बस रहे लोगों के ज्यादातर मामले इसी कारण से सिविल न्यायालयों में दशकों से चल रहे हैं, जिन पर मुकदमों का बोझ अत्यधिक होने के कारण न्याय पाने में पीढ़ियां तक निकल जाती हैं।
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) रामजीशरण शर्मा ने बताया कि इस तरह के मामलों में तीन माह की इस अवधि को एक साल किए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। ताकि, बाहर रहने वाले लोग जिनकी संपत्तियों पर किसी दूसरे ने कब्जा किया हुआ है वे अपना पक्ष एक साल के भीतर कभी भी रख सकें। इस तरह यदि वे साल में एक या दो बार भी आते हैं तो उनके मामलों को आसानी से सुना जाएगा। इससे साफ है कि ज्यादातर मामले जो पक्ष रखने की समयसीमा कम होने के कारण सिविल न्यायालयों को चले जाते हैं उन्हें राजस्व न्यायालयों में ही निस्तारित कर दिया जाएगा। इसके अलावा भी कई और महत्वपूर्ण सुझाव व प्रस्ताव राजस्व संहिता के लिए शासन को भेजे जाएंगे।
राजस्व न्यायालय ही ले पट्टे आवंटन का निर्णय
सरकारी जमीन को यदि कोई कारोबारी अपने इस्तेमाल के लिए लेना चाहता है तो इसके लिए भी राजस्व संहिता में प्रावधान किया जाए। ताकि, मनमाने तरीके से सरकारी पट्टे निजी उपयोग के लिए आवंटित न हों। संहिता में जब यह प्रावधान होगा तो राजस्व न्यायालय ही इसे निर्धारित करेगा कि किसे पट्टा आवंटित करना है और किसे नहीं।