ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
20 सूत्री मांगों के समर्थन में शुक्रवार को प्रदेशभर के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से वार्ता हुए बिना उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। शासन के अधिकारी सरकार और कर्मचारियों के बीच गलतफहमी पैदा कर रहे हैं। कर्मचारी अब 20 मई को विकास भवन में बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति बनाएंगे।
शुक्रवार को कर्मचारी परेड मैदान में एकत्रित हुए और सरकार पर समस्याओं का समाधान न करने का आरोप लगाते हुए धरना दिया। मोर्चा मुख्य संयोजक ठाकुर प्रह्लाद सिंह ने कहा कि शासन के अधिकारी जानबूझकर मामले को लटका रहे हैं। अब मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद ही इस मामले का समाधान निकलेगा। राजधानी दून में हजारों की संख्या में कर्मचारी धरने में शामिल हुए। लोगों को दिक्कत न हो, इसलिए सभी कर्मचारियों को इसमें शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार अब भी नहीं चेती तो प्रदेशभर के कर्मचारी आंदोलन करेंगे।
संयोजक सचिव रवि पचौरी ने कहा कि सरकार आए दिन तमाम कार्मिक विरोधी शासनादेश जारी कर रहा है, जिसके जरिये कर्मचारियों की सुविधाओं में कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन के बावजूद फैसला न होने पर दोबारा आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। बैठक में संतोष रावत, चौधरी अमी सिंह, रामचंद्र रतूड़ी, अरूण पांडे, प्रवीन रावत, रमेश बिंजोला, बाबूखान समेत अन्य कर्मचारी नेता मौजूद रहे।
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कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
मोर्चा ने सेवा काल में प्रत्येक कर्मचारी को तीन पदोन्नति का लाभ, एसीपी का लाभ, सातवें वेतनमान के समस्त भत्तों का लाभ, सार्वजनिक निगमों व उपक्रमों के कर्मचारियों को एरियर का लाभ, वेतन विसंगति का समाधान, उपनल व आउटसोर्स कर्मियों को नियमित करने और समान कार्य के लिए समान वेतन वेतन का लाभ, सभी कर्मचारियों को यू हेल्थ कार्ड योजना का लाभ देने की मांग की। साथ ही कार्मिकों को वाहन भत्ते का लाभ, वेतन समिति की पुर्नगठन रिपोर्ट को अस्वीकार करने, जिला पंचायत कार्मिकों को राजकीय कर्मचारी घोषित करने, वाहन चालकों की स्टाफिंग पैर्टन व्यवस्था को पूर्ववत रखने और स्थानांतरण एक्ट में 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी महिला कार्मिकों को छूट देने की भी मांग की।
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यह कर्मचारी संगठन हुए शामिल
मोर्चा में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, राज्य निगम कर्मचारी महासंघ, राजकीय शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, अशासकीय माध्यमिक शिक्षणेत्तर महासंघ, सचिवालय कर्मचारी संघ, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ, वाहन चालक महासंघ, उपनल कर्मचारी महासंघ, वन कर्मचारी महासंघ, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महासंघ, उत्तराखंड विद्युत कर्मचारी/अधिकारी संयुक्त मोर्चा, रोडवेज कर्मचारी/अधिकारी संयुक्त मोर्चा, निकाय कर्मचारी महासंघ, राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ, अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संगठन समेत 23 कर्मचारी संघ धरने में शामिल हुए।
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धरने से प्रभावित हुए काम
कर्मचारियों की हड़ताल के चलते तमाम सरकारी विभागों में काम प्रभावित हुए। सरकारी कर्मचारियों के साथ ही आउटसोर्स कर्मियों के भी हड़ताल पर रहने से लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ी। कई सरकारी अधिकारियों में ज्यादातर कर्मचारी हड़ताल पर रहे। वहीं, कार्यालयों में भी हड़ताल का असर देखा गया। ज्यादातर दफ्तरों में उपस्थिति बेहद कम रही।