ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने राजधानी के दो कॉलेजों डीएवी और एमकेपी की ग्रांट रोक दी है। यूजीसी ने यह निर्णय वित्तीय गड़बड़ी, नैक प्रमाणन न होने और समय से यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा न करने के चलते लिया है।
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से इतर यूजीसी कई मदों में कॉलेजों को पैसा देता है। कॉलेज के शिक्षकों को रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए भी पैसा मिलता है। इसी क्रम में यूजीसी से एमकेपी पीजी कॉलेज में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 45 लाख रुपये आवंटित हुए थे। इस पैसे से हुई खरीद-फरोख्त विवादों में आ गई। इस वजह से इस मामले में कॉलेज की ही कुछ शिक्षिकाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके अलावा करीब दो साल बाद तक भी यूजीसी के पास इस पैसे का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट नहीं भेजा जा सका है। इस संबंध में यूजीसी लगातार संबंधित कॉलेजों से पत्राचार कर रहा है। लिहाजा कॉलेज को मिलने वाली किसी भी तरह की ग्रांट पर यूजीसी ने रोक लगा दी है।
इसी प्रकार डीएवी पीजी कॉलेज को 10 वर्षों से अधिक समय से नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रिडिएशन काउंसिल (नैक) का प्रमाणन नहीं मिला है। नैक स्कोर न होने की वजह से कॉलेज को कोई ग्रांट नहीं मिल रही है। यूजीसी इससे पहले ही कॉलेज की गड़बड़ियों पर बनी एक रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज के रिसर्च प्रोजेक्ट्स को मिलने वाले बजट पर रोक लगा चुका है। अभी तक यह रोक भी नहीं हट पाई है।
इस मामले में एमकेपी पीजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. इंदु सिंह का कहना है कि जब तक यूजीसी को यूटिलाइजेशन का सर्टिफिकेट नहीं जाएगा, तब तक कॉलेज को यूजीसी से कोई ग्रांट नहीं मिल पाएगी। इसके लिए प्रयास जारी हैं।
दूसरी ओर डीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय सक्सेना का कहना है कि नैक प्रमाणन का काम तेज कर दिया गया है। शिक्षकों की अलग-अलग समितियां बना दी गई हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही कॉलेज को दोबारा नैक का प्रमाणन मिलेगा और ग्रांट मिलनी शुरू हो जाएगी। वहीं उन्होंने यूजीसी के रिसर्च प्रोजेक्ट को मिलने वाले बजट पर रोक की जानकारी से इनकार किया है।
यह हो रहा नुकसान
दोनों कॉलेजों को ग्रांट न मिलने की वजह से छात्रों को भारी नुकसान हो रहा है। यूजीसी से न केवल रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा मिलता है बल्कि कई मदों में विकास करने के लिए भी पैसा दिया जाता है। इसमें लाइब्रेरी से लेकर लैब तक का अपडेशन शामिल है।
खतरे में डीएवी में लॉ की मान्यता
डीएवी पीजी कॉलेज में एलएलबी की मान्यता भी खतरे में आ गई है। कॉलेज में एलएलबी के शिक्षकों के 15 पद हैं। जिनमें से 11 पद खाली हैं। गत वर्ष बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने 2016-17 की मान्यता देते हुए पत्र भेजा था कि जब तक शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं की जाएंगी, तब तक नए सत्र के दाखिले नहीं किए जाएंगे। हालांकि जब पत्र आया, तब तक कॉलेज में एलएलबी के दाखिले हो चुके थे। लिहाजा गत वर्ष जो लॉ के दाखिले हुए थे वे अवैध थे। बीसीआई के पत्र के हिसाब से इस साल भी एलएलबी के दाखिले नहीं किए जा सकते हैं। कॉलेज की शिक्षिका डॉ. पारुल दीक्षित का कहना है कि वह केवल चार शिक्षक पूरा डिपार्टमेंट चला रहे हैं। छह दिसंबर 2017 को रिक्त पदों पर भर्ती के लिए इंटरव्यू होने थे। चयन समिति के सदस्य और अभ्यर्थी भी पहुंच चुके थे, लेकिन पांच दिसंबर 2017 को शासन से एक पत्र आया, जिसमें बिना किसी कारण नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई। इसके बाद से आज तक सरकार ने नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू नहीं कराई है। जबकि जल्द ही बीसीआई की टीम निरीक्षण के लिए आने वाली है। ऐसे में लॉ की मान्यता खतरे में आ गई है।