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सरकारी योजनाओं में फंसे बैंकों के 430 करोड़ रुपये

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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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प्रदेश में बैंकों की 3242.83 करोड़ रुपये की रकम एनपीए में फंसने के बाद बैंकों पर दूसरा बोझ सरकारी सुस्ती का भी है। सरकारी योजनाओं के लिए दिए गए लोन के 430 करोड़ रुपये करीब पांच साल से बकाया हैं। बैंक रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी कर चुके हैं। आरबीआई भी सरकार को इन योजनाओं का पैसा वसूलने को कह चुका है। बावजूद इसके कोई हल नजर नहीं आ रहा है। इस वजह से बैंकों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है।
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स्टेट लेवल बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के आंकड़ों पर गौर करें तो सरकारी योजनाओं में फंसे धन की स्थिति साफ नजर आती है। प्रदेश में बैंक अभी तक 44026 लोगों का आरसी जारी कर चुके हैं। इन पर 430 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें कृषि से लेकर एमएसएमई तक सभी योजनाओं के लाभार्थी शामिल हैं। हैरत की बात यह है कि एक अप्रैल 2017 से 31 दिसंबर 2017 तक सरकार केवल 18.73 करोड़ रुपये ही रिकवर कर पाई है। बैंकों के नजरिए से देखें तो स्टेट बैंक का 153.80 करोड़ रुपये, पंजाब नेशनल बैंक के 34.68 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा के 21.93 करोड़ रुपये इन सरकारी योजनाओं में फंसे हैं। प्रदेशभर के कॉपरेटिव बैंकों के इन योजनाओं में 56.39 करोड़ रुपये फंसे पड़े हैं। उत्तराखंड ग्रामीण बैंक का 71.49 करोड़ रुपया फंसा है। कुल मिलाकर 37 में से 20 बैंकों का पैसा इन योजनाओं में फंसा है। हाल ही में हुई एसएलबीसी की बैठक में भी यह मामला उठा था तो वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने जल्द ही रिकवरी बढ़ाने का संकेत दिया है। रिजर्व बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि बैंकों के लिए सरकारी योजनाओं में फंसा पैसा भी बेहद चिंताजनक हैं, क्योंकि पांच-पांच साल से रिकवरी फंसी पड़ी है। आरसी के बाद बैंक भी कोई एक्शन नहीं ले पा रहे हैं।
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इन योजनाओं का पैसा फंसा
प्रधानमंत्री ग्रामीण रोजगार योजना
स्पेशल कंपोनेंट प्लान
पुनर्वास योजना
स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना
स्वर्ण जयंती ग्रामीण रोजगार योजना
कृषि ऋण
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम
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